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अमेरिकी परियोजना की मंजूरी के लिए सिंगल विंडो

Wed, 26 Nov 2014 09:14 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
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देश में ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी निवेश लाने के लिए सरकार अमेरिकी परियोजनाओं की मंजूरी के लिए सिंगल विंडो प्रणाली मुहैया कराएगी। यही सुविधा अमेरिका भारत में भारतीय निवेशकों को मुहैया कराएगा। इसके साथ ही भारतीय मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में अमेरिकी हिस्सेदारी बढ़ने की प्रबल संभावना हो गई है।
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अमेरिका भारत को सेवा व कृषि क्षेत्र में भी पूरा सहयोग देने पर राजी हो गया है। मंगलवार को इंडिया-यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड पॉलिसी फोरम (टीपीएफ) के तहत आयोजित बैठक में वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत माइकल फ्रोमैन के बीच व्यापार, कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, सेवा, निवेश, बौद्धिक संपदा, विश्व व्यापार संगठन व अन्य कई मसलों पर विस्तृत बातचीत की गई। फोरम के तहत दोनों देशों के बीच यह आठवीं बैठक थी। टीपीएफ की अगली बैठक अगले साल अमेरिका में होगी।

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच आयोजित बैठक में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सितंबर माह में अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हुई बातचीत को आधार बनाया गया। टीपीएफ की बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए दोनों देश अपनी निवेश नीति को पारदर्शी बनाएंगे और निवेश अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए सिंग्ल विंडो प्रणाली विकसित की जाएगी। भारत उत्पादों की पैकेजिंग व लेवलिंग में अंतरराष्ट्रीय मानकों का ख्याल रखेगा। दोनों देशों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के मेक इन इंडिया आंदोलन को ध्यान में रखकर कई व्यापारिक मसलों पर चर्चा की गई।
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बैठक में भारत और अमेरिका ने आपस में कृषि व्यापार बढ़ाने पर सहमति दे दी। दोनों देश एक-दूसरे के कृषि उत्पादों को अपने-अपने यहां बाजार मुहैया कराएंगे। इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि किन-किन कृषि उत्पादों को एक-दूसरे के बाजार में प्रवेश दिया जाए। दोनों देशों के बीच पौधों के साथ जानवरों की सेहत व खाद्य वस्तुओं की सुरक्षा जैसे मसलों पर नई तकनीक हासिल करने पर भी वार्ता की जाएगी।

व्यापारिक मसलों पर बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच सेवा क्षेत्र का दायरा और बढ़ाने पर रजामंदी बन गई। अमेरिका की तरफ से इस बात का आश्वासन दिया गया कि उनका देश भारतीय प्रोफेशनल्स के प्रवेश व उनके हित का ध्यान रखेगा। हालांकि प्रोफेशनल्स के वीजा शुल्क और उन्हें वीजा मिलने में होने वाली दिक्कतों पर कोई सहमति नहीं बन पाई।

बौद्धिक संपदा व कॉपीराइट से जुड़े मसलों पर दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां जागरूकता लाने पर सहमति जताई। अमेरिका के साथ इस बात को लेकर भी चर्चा की गई कि भारत में बेहतर स्वास्थ्य व सस्ती दवाई की सुविधा मुहैया कराने में अमेरिका सहयोग कर सकता है। जेनेरिक दवाइयों के मसले पर दोनों देशों के बीच चर्चा की गई।
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