2014 के लोकसभा चुनाव तक भ्रष्टाचार और महंगाई की बदनामी को धोने में जुटी सरकार ने 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 30 लाख पेंशनरों को त्योहारों से पहले बंपर तोहफा दे दिया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी देकर दिल्ली की कुर्सी की ओर कदम बढ़ा रहे नरेंद्र मोदी का रास्ता रोकने के लिए बड़ा दांव खेल दिया है।
2014 का फाइनल ही नहीं बल्कि इसी साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के लिए मनमोहन सरकार की यह पहल तुरुप का इक्का मानी जा रही है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों को अपने हक में करने के लिए कांग्रेस के इस मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष भी भौचक्का हो गया है।
खास यह है कि आयोग का गठन आमतौर पर हर नौ साल के बाद होता है। मगर यह पहली बार हुआ है जब सरकार ने आठ साल बाद ही वेतन आयोग के गठन का फैसला कर लिया है।
आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू होंगी, इसलिए इस फैसले के कारण सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ से बचने का रास्ता नई सरकार को तलाशना होगा।
एक अनुमान के मुताबिक आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकारी खजाने पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इस फैसले से पहले ही वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्यों की परेशानी भी भविष्य में बढ़ जाएंगी। दरअसल राज्य सरकारें भी आयोग की सिफारिशों को अपने स्तर पर मामूली फेरबदल या हूबहू लागू करती हैं।
सरकार के इस फैसले की सूचना वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने सातवें वेतन आयोग के गठन पर सहमति दे दी है। बहुत जल्दी इस आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन का काम पूरा कर लिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि आयोग को सिफारिशें तैयार करने में लगभग दो साल का समय लगता है। आयोग के गठन को मंजूरी के फैसले में दिखाई गई जल्दबाजी से साफ हो गया है कि सरकार अब पूरी तरह से चुनाव एक्सप्रेस पर सवार हो गई है।
वोट बटोरू दांव
वेतन आयोग हर नौ साल बाद गठित होता है लेकिन दिल्ली समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और फिर 2014 में आम चुनाव में वोट बटोरने के लिए यूपीए सरकार ने वेतन आयोग के गठन की घोषणा इस बार आठ साल बाद ही कर दी। दिल्ली में सबसे अधिक केंद्रीय कर्मचारी रहते हैं।
नई सरकार पर पड़ेगा बोझ
वेतन आयोग की सिफारिशें दो साल से भी अधिक समय बाद लागू होनी हैं। ऐसे में मनमोहन सरकार की ओर से की गई इस घोषणा के बाद वेतन बढ़ोतरी के बोझ नई सरकार पर पड़ेगा।
वेतन में 40 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद
सातवें वेतन आयोग के ऐलान के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों में वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद जगा चुकी है। साथ ही 50 फीसदी से ज्यादा डीए को मूल वेतन में जोड़ने की मांग भी उठने लगी है।
आयकर कर्मचारी महासंघ के महासचिव अशोक कनौजिया का कहना है कि 5वें वेतन आयोग के लागू होने से वेतन में 40 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी।
6वें आयोग से निचले स्तर पर करीब 20 फीसदी और उच्च स्तर पर तीन गुना वेतन बढ़ा था। कनौजिया का कहना है कि नए आयोग से कर्मचारियों को कम से कम 40 फीसदी वेतन बढ़ने की उम्मीद है।
5 साल में वेतनमान संशोधन की मांग
केंद्रीय कर्मचारियों ने 10 साल के बजाय हर 5 साल में वेतनमान संशोधित करने की मांग भी उठाई है। केंद्र सरकार कर्मचारी एवं कामगार महासंघ के अध्यक्ष केकेएन कुट्टी का कहना है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2011 से लागू होनी चाहिए।
पीएसयू कर्मचारियों की तरह केंद्र सरकार के बाकी कर्मचारियों को भी हर पांचवें साल वेतनमान संशोधन का फायदा देना चाहिए।
अर्थव्यवस्था में लौटेगी रौनक
केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था की रौनक लौटने की उम्मीद है। आईसीएआई के अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल का कहना है कि वर्ष 2008 की मंदी की मार को बेअसर करने में छठे वेतन आयोग की अहम भूमिका रही थी। इस बार भी वेतन आयोग की सिफारिशें अर्थव्यवस्था की रौनक बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं।
--80 लाख केंद्रीय कर्मियों को मिलेगा लाभ। इनमें से 50 लाख कर्मचारी हैं तो 30 लाख पेंशनर।
--1 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा सरकारी खजाने पर सिफारिशें लागू होने से।