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रुपये का निकला दम, बाजार बेदम

Tue, 20 Aug 2013 12:54 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
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सरकार के तमाम उपायों और कोशिशों के बावजूद सोमवार को एक बार फिर डॉलर के मुकाबले रुपया बुरी तरह पस्त हो गया। वहीं, शेयर बाजार भी डेढ़ फीसदी से अधिक लुढ़ककर 11 महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया।
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डॉलर के मुकाबले रुपया 63 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को 63.30 रुपये प्रति डॉलर की रिकॉर्ड गिरावट के बाद यह पिछले स्तर के मुकाबले 148 पैसे गिरकर 63.13 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।

रुपये में यह दशक में सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट है। इससे पहले 22 सितंबर, 2011 को रुपया 124 पैसे लुढ़का था।

वहीं, सोमवार को रुपये में रिकॉर्ड गिरावट के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों की चौतरफा बिकवाली से बीएसई का सेंसेक्स 290.66 अंक धराशायी होकर 18,307.52 पर और एनएसई का निफ्टी 93.10 अंक नीचे 5,415.75 अंक पर सिमट गया।
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रुपये की गिरावट से चिंतित वित्त मंत्री पी. चिदंबरम सोमवार को दिन भर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन करते रहे। मंगलवार को भी बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है। रुपये में आ रही इस गिरावट का खामियाजा आम आदमी को बेलगाम महंगाई के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

इसके चलते तमाम आयात महंगे होते जा रहे हैं और डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और प्राकृतिक गैस से ऊर्जा उत्पादों के दाम बढ़ना लगभग तय है।

जिस तरह से सोना आयात पर सरकार ने सीमा शुल्क बढ़ाने से लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं उसी तरह की पाबंदी उपभोक्ता उत्पादों के आयात पर भी लगना संभव है।

रुपये में आ रही गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने जिस तरह से नकदी की उपलब्धता को कम करने की कोशिश की और विदेशी मुद्रा बाहर ले जाने से जुड़े नियमों को सख्त किया उसका नतीजा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आने लगा है।

सोमवार को एक्सिस बैंक ने ब्याज दर में बढ़ोतरी कर दी। यानी महंगाई के साथ ईएमआई में बढ़ोतरी बोझ भी आम आदमी को झेलने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।

वहीं कॉरपोरेट जगत पर भी इसकी भारी मार पड़ रही है क्योंकि देश की अधिकांश बड़ी कंपनियों ने भारी विदेशी कर्ज लिया है और उनकी देनदारी अब बढ़ जाएगी जो उनके मुनाफे पर सीधा असर डाल रही है जिससे रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे।

विदेशी निवेशक निकाल रहे पैसा
मई से लेकर अभी तक बाजार से 11 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा बाहर गई है। इस हालात को कई लोग 1991 की तरह की स्थिति बता रहे हैं लेकिन उस समय देश में केवल तीन सप्ताह के आयात का विदेशी मद्रा भंडार था। इस समय यह सात माह के आयात के बराबर है।

फ्लैट टीवी लाने पर लगेगा टैक्स
विदेश से महंगा फ्लैट टेलीविजन साथ लाने वाले हवाई यात्रियों को अब इस पर शुल्क चुकाना पड़ेगा। रुपये में रिकॉर्ड गिरावट को देखते हुए सरकार ने विदेश से शुल्क मुक्त फ्लैट स्क्रीन टीवी लाने पर रोक लगा दी है। सरकार का यह फैसला 26 अगस्त से प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत अब यात्रियों को अपने साथ फ्लैट टीवी लाने पर 36.05 फीसदी शुल्क चुकाना पड़ेगा।
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रुपये में गिरावट का क्या होगा असर
- पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे और भड़केगी महंगाई।
- देश की रेटिंग घटने का खतरा बढ़ा।
- आयात की लागत बढ़ने से व्यापार घाटे में होगी बढ़ोतरी।
- सोने का आयात महंगा हो जाएगा, यह व्यापार घाटे को बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार असंतुलन को भी बढ़ाएगा।
- आयातित उत्पाद जैसे लग्जरी कारें, एलसीडी, प्लाज्मा, फ्रिज, एसी आदि हो जाएंगे महंगे।
- जिन कंपनियों ने विदेशी कर्ज ले रखा है, अब उन्हें अपने कर्ज के एवज में ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।
- विदेशी यात्रा के साथ विदेश में शिक्षा भी हो जाएगी अधिक खर्चीली।
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