अमेरिका में फिस्कल क्लिफ बिल को मंजूरी मिलने से घरेलू बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद के बीच तगड़ी लिवाली से घरेलू शेयर बाजार में मजबूती का रुख रहा। बीएसई का सेंसेक्स जहां दो साल के टॉप पर पहुंच गया, वहीं एनएसई का निफ्टी भी करीब दो साल बाद 6,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में कामयाब रहा हालांकि बंद होने तक वह इसे बरकरार नहीं रख सका।
सेंसेक्स 133.43 अंक के उछाल के साथ 19,714.24 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले यह स्तर उसने 6 जनवरी 2011 को छुआ था। निफ्टी 6,006.05 अंक की ऊंचाई तक जाने के बाद आखिर में 42.40 अंक की बढ़त के साथ 5,993.25 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से 23 लाभ में रहे, जबकि सात को नुकसान उठाना पड़ा। सेंसेक्स मजबूती के साथ 19,693.30 अंक पर खुला और कारोबार के दौरान इसने 19,756.68 अंक की ऊंचाई को छुआ। अंत में यह 133.43 अंक या 0.68 फीसदी की बढ़त के साथ 19,714.24 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टाक एक्सचेंज का 50 शेयरों पर आधारित सूचकांक निफ्टी भी 42.40 अंक या 0.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 5,993.25 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह 6,000 अंक को पार करते हुए 6,006.05 अंक तक चला गया था। जनवरी 2011 के बाद यह पहला मौका है कारोबार के दौरान जब निफ्टी 6,000 अंक के पार गया। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा वित्तीय संकट टाले जाने के लिये विधेयक पारित किए जाने का निवेशकों की धारणा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे यूरोपीय बाजारों में साथ-साथ घरेलू बाजारों को भी मजबूती मिली।
सेंसेक्स में मुनाफा कमाने वालों में बजाज ऑटो 3.07 फीसदी, ओएनजीसी 2.74, मारुति 2.50, ओएनजीसी 2.38, स्टरलाइट 2.19 फीसदी के साथ टॉप-5 गेनर में शामिल रहे। दूसरी ओर गिरावट वाले शेयरों में विप्रो 078 फीसदी, आईटीसी 0.61, महिंद्रा 0.44, कोल इंडिया 0.35 व हिन्दुस्तान यूनिलीवर 0.14 फीसदी के साथ टॉप-5 लूजर में शामिल रहे। सेंसेक्स में बढ़त हासिल करने वाले वर्गों में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.65 फीसदी, कैपिटल गुड्स 1.40, तेल-गैस 1.29, पीएसयू 1.02, बैंकिंग 0.96 व ऑटो 0.92 फीसदी की बढ़त में रहे।