रेलवे में पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश बढ़ाने का इरादा जताने के बावजूद मोदी सरकार का पहला रेल बजट घरेलू शेयर बाजार को रास नहीं आया। भारी बिकवाली के दबाव में बाजार पटरी से उतर कर 10 महीने की सबसे बड़ एक दिनी गिरावट के साथ बंद हुआ।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 517.97 अंक टूट कर 25,582.11 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 163.95 अंक की गिरावट के साथ 7,623.20 पर रहा। बाजार में यह 3 सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट रही।
दिग्गज कंपनियों की तुलना में छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का अधिक दबाव रहा। बीएसई के मिडकैप में 3.63 फीसदी व स्मॉलकैप में 4.19 फीसदी की गिरावट रही। बीएसई में सबसे ज्यादा 7.16 फीसदी की गिरावट रीयल्टी सेक्टर में देखने को मिली। इसके अलावा पावर, कैपिटल गुड्स, मेटल, तेल एवं गैस, ऑटो शेयर, बैंकिंग, हेल्थकेयर, आईटी और एफएमसीजी वर्ग भी गिरावट में रहे।
बीएसई में कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई और सेंसेक्स 66 अंक की तेजी के साथ 26,166.92 अंक पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही लिवाली के बल पर यह 26,190.44 अंक के उच्चतम स्तर तक चढ़ा लेकिन इसी दौरान संसद में पेश रेल बजट उम्मीद के अनुरूप नहीं रहने से बाजार में गिरावट आनी शुरू हो गई।
बीएसई में कुल 3,096 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 770 बढ़त में और 2,234 गिरावट में रहे, जबकि 92 पिछले सत्र पर टिके रहे। सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से केवल सन फार्मा और एचडीएफसी ही बढ़त में रहे। शेष सभी गिरावट का शिकार हुए।
नुकसान उठाने वाले शेयरों में भेल, एनटीपीसी, टाटा पावर, कोल इंडिया, एलएंडटी, टाटा स्टील, ओएनजीसी, एसबीआई, एसएसएलटी, रिलायंस, हिंडाल्को, बजाज ऑटो, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, मारुति, एक्सिस बैंक, डा रेड्डीज, सिप्ला, हीरो मोटोकार्प, गेल, एयरटेल, टीसीएस, विप्रो, एचडीएफसी बैंक, इनफोसिस, आईटीसी और हिन्दुस्तान यूनिलीवर शामिल रहे।