सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा समूह की दो कंपनियों और समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय व अन्य तीन निदेशकों के बैंक खाते और डिमैट खाते फ्रीज कर दिए। इसके साथ ही सेबी ने सुब्रत राय और तीनों निदेशकों की चल व अचल संपत्ति भी अटैच कर दी है।
सेबी ने यह कार्रवाई न्यायिक आदेश के बावजूद निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये नहीं लौटाने के मामले में की है। सेबी ने इस कार्रवाई की सूचना भारतीय रिजर्व बैंक और प्रवर्तन निदेशालय को भी भेज दी है।
साथ ही सेबी ने आदेश दिया है कि सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय व अन्य तीनों निदेशक अपने शेयर किसी को भी हस्तांतरित नहीं करें। सेबी ने देर शाम सहारा समूह की कंपनियों सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के संबंध में जारी दो आदेशों के तहत यह निर्देश दिए हैं। सेबी के यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
सेबी ने बुधवार को सहारा समूह के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय व तीन निदेशकों वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी सहित समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के बैंक व डीमैट खाते फ्रीज कर दिए।
सेबी ने सुब्रत राय और तीन अन्य अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति को अटैच कर दी। इसके साथ ही सेबी ने सुब्रत रॉय व तीनों निदेशकों को 21 दिन के भीतर अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है।
इससे पहले 6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी से कहा था कि वह न्यायिक आदेश के बावजूद निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये नहीं लौटाने के मामले में सहारा समूह की दो कंपनियों के खाते और संपत्ति जब्त करने के लिए स्वतंत्र है। सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ सेबी की अवमानना कार्यवाही के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही थी।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने 31 अगस्त 2012 के आदेश के अनुरूप सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं करने के कारण सेबी को भी आड़े हाथ लिया था। इस आदेश के तहत न्यायालय ने सेबी को इन कंपनियों के खाते सील करने और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।
सेबी ने पुराने तथ्यों के आधार पर की कार्रवाई: सहारा
सेबी की कार्रवाई की प्रतिक्रिया में सहारा ने देर रात जारी बयान में कहा कि कंपनी की कुल देनदारी 5120 करोड़ रुपये से ज्यादा की नहीं होगी और कंपनी यह रकम पहले ही सेबी के पास जमा करा चुकी है। सहारा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के सेबी के पास किस्तें जमा कराने से संबंधित आदेश को लेकर कंपनी ने शीर्ष अदालत में एक अंतरिम आवेदन दिया है, जिस पर जल्द ही सुनवाई होनी है।
सहारा का कहना है कि सेबी ने पुराने तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है, उसने नए तथ्यों पर गौर नहीं किया। कंपनी ने कहा है कि मामले में सेबी का निजी व्यक्तियों की संपत्ति अटैच करने का कदम सही नहीं है।
सेबी द्वारा सहारा समूह की अटैच होने वाली कुछ संपत्तियां
- सहारा समूह की दो कंपनियों के पुणे स्थित एम्बी वैली प्रोजेक्ट से जुड़े डेवलपमेंट अधिकार।
- सहारा इंडिया कमर्शियल कार्प के स्वामित्व वाली मुंबई स्थित वर्सोवा प्रोजेक्ट में 26 फीसदी हिस्सेदारी।
- सहारा समूह की 10 शहरों में पार्टनरशिप के तहत 10 रीयल्टी परियोजनाओं में 90-95 फीसदी हिस्सेदारी।
- सहारा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड हाउसिंग लिमिटेड के तरजीही शेयर (वैल्यू 204 करोड़ रुपये)।
- एसआईआरईसीएल के म्यूचुअल फंड के यूनिट (वैल्यू करीब 23 करोड़ रुपये)।
क्या है मामला
--सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन पर सेबी की बिना मंजूरी के बाजार से पैसे उगाहने का अभियोग।
--समूह की दोनों कंपनियों ने 3 करोड़ निवेशकों से उगाहे 17,500 करोड़ रुपये।
--सुप्रीम कोर्ट ने 15 फीसदी ब्याज के साथ निदेशकों को रकम लौटाने का दिया था आदेश।
--कोर्ट ने यह रकम तीन किश्तों में निवेशकों को लौटाने को कहा था।