अपनी बिल्डिंग को कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए किराए पर देने वाले स्कूल-कॉलेजों को अब सर्विस टैक्स भरना पड़ेगा। अभी तक स्कूलों की ओर से दी जाने वाले सभी शैक्षिक और सहायक सेवाएं पूरी तरह से सेवाकर के दायरे से बाहर हैं, लेकिन अब सरकार की नजर गैर-शैक्षिक गतिविधियों के जरिए होने वाली कमाई पर है। इस बाबत राजस्व विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर दी है।
गत 1 मार्च को जारी इस अधिसूचना के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों की ओर से अचल संपत्ति किराए पर देने और लेने के बजाय अब सिर्फ संपत्ति किराए पर लेना ही सेवा कर से मुक्त होगा। इस तरह अपनी इमारत या मैदान किराए पर देना अब सेवा कर के दायरे में आ गया है। अचल संपत्ति के अलावा इन संस्थानों की ओर दे दी जाने वाले सहायक सेवाओं पर भी 12.36 फीसदी सेवाकर वसूला जाएगा।
सेवाकर आयुक्त गौतम भट्टाचार्य का कहना है कि अगर कोई संस्थान प्रवेश परीक्षा कराने या फिर कोई अन्य सहायक सेवाएं लेता है, तो इस पर अब भी कोई सेवा कर नहीं लगेगा। सिर्फ सेवाएं देने पर टैक्स भरना होगा। इस हालिया संशोधन का असर अपनी प्रॉपर्टी के कॉमर्शियल इस्तेमाल से कमाई करने वाले संस्थानों पर पड़ेगा। गैर शैक्षिक गतिविधियों के जरिये कमाई कर रहे संस्थानों को सेवाकर देने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले साल 20 जून से सरकार ने मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों की सेवाओं को सेवाकर की छूट दी थी। इस साल बजट में वित्त मंत्री ने वोकेशलन एजुकेशन देने वाले संस्थानों को भी इस छूट का लाभ देने की घोषणा की है।