सरकार ने सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक शेयर होल्डिंग के लिए नियमों को लागू कर दिया है। जिससे तीन साल में 60,000 करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी कंपनियों के शेयरों की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है।
प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियमों में संशोधन के लिए जारी अधिसूचना के मुताबिक इन नियमों की अनुपालना के लिए 30 से अधिक सरकारी कंपनियों को 21 अगस्त 2017 तक न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक होल्डिंग जुटाने की जरूरत होगी। इस कदम से सरकारी कंपनियों में निवेशकों का आधार बढ़ाने में मदद मिलेगी और विनिवेश कार्यक्रम से पूंजी जुटाने की सरकार की योजना को प्रोत्साहन मिलेगा।
इससे पहले, सरकारी कंपनियों में कम से कम 10 फीसदी पब्लिक शेयर होल्डिंग अनिवार्य थी। जबकि गैर सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में पहले से ही न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक शेयर होल्डिंग का प्रावधान है। गैर सरकारी कंपनियों को जून 2010 में तीन साल के भीतर 25 फीसदी न्यूनतम पब्लिक शेयर होल्डिंग की शर्त पूरी करने को कहा गया था। जून 2013 में यह समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद अब भी 105 सूचीबद्ध कंपनियों ने इन नियमों का अनुपालन नहीं किया है। बाजार नियामक सेबी ने इनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
वित्त मंत्रालय ने सरकारी कंपनियों के लिए जारी अपनी नई अधिसूचना में कहा है कि प्रत्येक सूचीबद्ध सरकारी कंपनी जिसमें पब्लिक होल्डिंग 25 फीसदी से कम है, उन्हें तीन साल के भीतर सेबी द्वारा तय व्यवस्था के तहत इसे बढ़ाकर कम से कम 25 फीसदी करना होगा। नई अधिसूचना से सभी सूचीबद्ध कंपनियों में एकरूपता आएगी, चाहे प्रमोटर कंपनी सरकारी क्षेत्र की हो या निजी क्षेत्र की।
मौजूदा मूल्यांकन के आधार पर 30 से अधिक कंपनियों में प्रमोटरों को अपनी हिस्सेदारी घटानी है। इस तरह सरकार शेयरों की बिक्री से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटा लेगी। हालांकि, इस आंकड़े में फेरबदल संभव है क्योंकि इन शेयरों की बिक्री करीब तीन साल की लंबी अवधि के दौरान करनी है। बड़ी सरकारी कंपनियां जिनमें पब्लिक शेयर होल्डिंग 25 फीसदी से कम है उनमें कोल इंडिया, सेल, एमएमटीस्री एनएचपीसी, एनएमडीसी और एसजेवीएन शामिल हैं।