सहारा के वास्तविक निवेशकों को तलाशने की बाजार नियामक सेबी की कोशिशें
व्यर्थ साबित होती दिख रही हैं, वहीं यह पूरी खोज प्रक्रिया नियामक के लिए
काफी खर्चीली साबित हो रही है।
अनुमान है कि इस प्रक्रिया में सेबी का चालू वित्तवर्ष के लिए करीब 60 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च अगले साल और बढ़ सकता है।
निवेशकों को 24,000 करोड़ रुपये और 15 फीसदी अतिरिक्त ब्याज लौटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को अगस्त 2012 में सभी संबंधित दस्तावेज और रिफंड रकम सेबी के पास जमा कराने को कहा था।
जिससे कि सेबी दस्तावेजों की पड़ताल के बाद वास्तविक निवेशकों को भुगतान कर सके। सेबी का मानना है कि सहारा द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों को संभालने का खर्च अगले वित्त वर्ष में और बढ़ सकता है।
इसकी वजह अतिरिक्त दस्तावेजों जैसेकि प्रॉपर्टी टाइटल डीड और स्केन्ड इमेज आदि को स्टोर करने पर हो रहे खर्चे हैं।