ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) ने भारतीय अर्थव्यवस्था की राह आगे बेहद कठिन होने की चेतावनी देते हुए कहा है कि इसके बावजूद फिलहाल देश में 1991 जैसे आर्थिक संकट का खतरा नहीं है।
एसएंडपी ने राजकोषीय घाटे, चालू खाते के घाटे और रुपए में रिकॉर्ड गिरावट का हवाला देते हुए कहा है भारत के लिए आगे की राह काफी कठिन रहने वाली है क्योंकि अर्थव्यवस्था की हालत आगे और खराब होगी।
एसएंडपी ने भारत और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ते राजकोषीय घाटे को विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।
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उसने कहा है कि वित्तीय तंगी से ऐसे देश की सरकारें अपनी विकास योजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध नहीं करा सकेंगी, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था के लड़खड़ाने का खतरा बना रहेगा। ऐसे में इन देशों पर विदेशों से आर्थिक मदद लेने का दबाव बढे़गा।
पूंजी बाजारों में गिरावट का जिक्र करते हुए एसएंडपी ने कहा है कि यह स्थिति बहुत कुछ विदेशी कारणों पर निर्भर कर रही है।
उसने कहा कि अमेरिका में हर माह की जाने वाली बांड खरीद जारी को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख अहम भूमिका निभा सकता है।
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एसएंडपी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शुरुआती कारोबार में ही रुपया गिरावट के सभी रिकॉर्ड तोडते हुए 68.75 रुपए प्रति डॉलर के निचले स्तर तक गिर गया।
एशियाई देशों की मुद्राओं में रुपए का प्रदर्शन सबसे खराब बना हुआ है। रुपए में रिकॉर्ड गिरावट को देखते हुए शेयर बाजार भी दबाव में रहा।