प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी. रंगराजन ने कहा कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की क्रेडिट रेटिंग घटने का खतरा टल सकता है। रंगराजन ने कहा कि सरकार के इस कदम से रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति में नरमी बरतने की गुंजाइश बनेगी, जिससे आर्थिक वृद्धि दर को रफ्तार देने में मदद मिलेगी। रंगराजन ने कहा कि हमें डीजल और पेट्रोल की कीमतों में संतुलन रखना होगा। हाल ही में ऐसे कई मौके आए, लेकिन डीजल पर हमने कोई कदम नहीं उठाया। अब सरकार के इस कदम से रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती करना संभव हो पाएगा।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय का कहना है कि पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाने का फैसला वित्तीय मोर्चे पर सरकार को डीजल के दाम बढ़ाने से मिलने वाले लाभ को कुछ कम कर सकता है, लेकिन यह मजबूत कदम है। साथ ही यह रिजर्व बैंक को दरें घटाने के लिए सरकार की ओर से एक संकेत साबित हो सकता है। येस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा कि डीजल के दाम बढ़ाकर और एलपीजी की सब्सिडी पर अंकुश लगाकर सरकार ने कम से कम कुछ साहसिक पहल की है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए जरूरत इससे बड़े सुधारात्मक कदम उठाने की है।
कैपिटल पोर्टफोलियो एडवाइजर्स के एमडी व प्रिंसिपल पोर्टफोलियो मैनेजर पारस अदनवाला का कहना है कि डीजल की कीमत में पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी उम्मीद से कहीं अधिक है। यह ईंधन की कीमतों को पटरी पर लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि सरकार इस बढ़ोतरी को वापस नहीं लेती है तो इससे एफआईआई निवेश में बढ़ोतरी का माहौल बनेगा।
कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे पता चलता है कि सरकार सुधार की दिशा में आखिरकार कुछ करना चाहती है। लेकिन यह इस दिशा में केवल पहला कदम है और वित्तीय घाटे को काबू में लाने के किए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। प्रभुदास लीलाधर के सीईओ संदीप सब्बरवाल का कहना है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी एक सकारात्मक कदम है। आगामी 17 सितंबर को पेश होने वाली आरबीआई की मध्य तिमाही मौद्रिक समीक्षा से ठीक पहले सरकार की ओर से यह कदम उठाया जाना केंद्रीय बैंक के लिए दरों में कटौती करने का एक मजबूत संकेत है।