केजी डी6 के तेल कुंओं की सही से ड्रिलिंग नहीं करने के आरोप में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर 5,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पेनाल्टी लग सकती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर पहले ही 6500 करोड़ रुपए की पेनाल्टी पहले ही लग चुकी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर अतिरिक्त पेनाल्टी लगाने के मुददे पर पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने कानून एवं न्याय मंत्रालय से राय मांगी है।
द हिंदू के मुताबिक पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के सचिव विवेक रे ने बताया कि हम रिलायंस पर पहले ही लगभग 6500 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगा चुके हैं।
रे ने बताया कि वर्ष 2012-13 के दौरान केजी डी6 से सही से ड्रिलिंग न किए जाने का परीक्षण किया जा रहा है। इस पर कानून और न्याय मंत्रालय से राय मांगी गई है।
वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान केजी डी6 से कुल 86.73 एमएमएससीएमडी गैस का उत्पादन किया जा सकता था। पर उस अवधि में सिर्फ में 26.07 एमएमएससीएमडी(मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स पर डे) ही उत्पादन किया जा सका।
अपने ऊपर लगी हजारों करोड़ रुपए की पेनाल्टी को लेकर रिलांयस सुप्रीम कोर्ट में चली गई है।
इससे पहले कैग ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि तेल कुंओं की जांच में कंपनी सहयोग नहीं कर रही है।
कैग ने यह बात ऐसे समय में दर्ज कराई है, जब एक माह पहले ही केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा था कि केजी डी6 गैस ब्लॉक के ऑडिट में कोई समस्या नहीं आ रही है।
कैग ने पेट्रोलियम मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि रिलायंस की तरफ से तेल कुंओं की जांच करने में मदद नहीं की जा रही है।
कैग ने लिखा है कि कई बार आग्रह करने के बाद भी रिलायंस सिस्टम एप्लीकेशन एंड प्रोडक्ट के सभी माड्यूल को जांचने नहीं दे रही है।
कंपनी ने मानव संसाधन, बिक्री, वितरण और प्रोजेक्ट सिस्टम मॉड्यूल को सौंपने से मना कर दिया है।
सामने आया मुकेश अंबानी के रिलायंस का बड़ा झूठ
कैग ने पहले ही अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि रिलायंस इंडस्टीज लिमिटेड वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक का ऑडिट कराने में सहयोग नहीं कर रहा है।
इसके अलावा रिलायंस ने फायनेंशियल ओर मेटेरियल मैनेजमेंट की जानकारी देने से भी मना कर दिया है।
इससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर 2.4 अरब डॉलर की पेनाल्टी लगाने को कहा है।
उन्होंने कहा कि केजी डी6 ब्लॉक से गैस का उत्पादन गिरने के कारण रिलायंस से अप्रैल 2014 से 4.2 डॉलर एमएमबीटीयू की दर से पेनॉल्टी लगाई जानी चाहिए।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी पेट्रोलियम मंत्रालय को जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सवाल पूछा है कि किस आधार पर अप्रैल 2014 से गैस की कीमत 8 डॉलर मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट की गई है।