कर्ज में डूबी किंगफिशर एयरलाइंस पर अब कर विभाग की मार पड़ने वाली है। कंपनी पर बकाया 200 करोड़ रुपये के टैक्स को अब वसूलने के लिए राजस्व विभाग तैयारी कर रहा है। मंगलवार को सीआईआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सीबीईसी की चेयरपर्सन प्रवीण महाजन ने संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने कंपनी पर बकाया कर राशि का आंकलन कर लिया है और अब हम बकाया कर वसूलने के लिए एक व्यापक योजना बना रहे हैं।
किंगफिशर की शुरूआत 2005 से हुई थी। कंपनी तभी से घाटे में चल रही है और उस पर अभी तक 200 करोड़ रुपये का कर बकाया है। महाजन ने कहा कहा कि हम पहले ही किंगफिशर के खातों पर रोक लगा चुके हैं। सेवाकर कानून में जो भी प्रावधान हैं, हम उनका इस्तेमाल कर चुके हैं क्योंकि यह हमारे भी हित में है।
महाजन ने कंपनी पर मुकदमा चलाने के सवाल पर कहा कि मुकदमा भी हो सकता है लेकिन हर चीज में समय लगता है। किसी पर मुकदमा करने से पहले आपको कई कदम उठाने होते हैं। सीबीईसी प्रमुख ने संकेत दिया कि राजस्व विभाग विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए से भी इस मामले पर बात कर सकता है क्योंकि विमानन कंपनी इस महीने के अंत तक डीजीसीए को एक व्यापक पुनरुद्धार योजना पेश करने वाली है।
अप्रत्यक्ष करों के लक्ष्यों पर महाजन ने कहा कि हमें भरोसा है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में 5.05 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी। अप्रैल से सितंबर के दौरान अप्रत्यक्ष कर में 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।