यदि कोई रिटेलर (खुदरा बिक्रेता) खराब उत्पाद बेचता है तो कंपनी पर दोष मढक़र अपनी जिम्मेदारियों से मुकर नहीं सकता। उपभोक्ता अदालत ने ऐसे ही एक मामले में हॉटस्पॉट रिटेल्स लिमिटेड पर ग्राहक को खराब मोबाइल बेचने के जुर्म में 23000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
पूर्वी दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निपटारा फोरम ने कहा है कि ग्राहक का प्रोडक्ट निर्माता कंपनी के साथ कोई समझौता नहीं होता, वह तो खुदरा बिक्रेता से सामान खरीदता है। यदि खुदरा बिक्रेता कोई ऐसा सामान बेचता है जिस पर निर्माता कंपनी भी कोई वारंटी नहीं दे रही है तो वैसे खराब सामान की बिक्री के लिए वह भी (रिटेलर) बराबर का दोषी है।
एनए जैदी की अध्यक्षता वाली जिला अदालत ने रिटेलर की उस याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही जिसमें वह मोबाइल की खराबी के लिए कंपनी को जिम्मेदार ठहरा रहा था एवं अपनी कोई भी जिम्मेदारी लेने से मना कर रहा था। फोरम ने यह फैसला दरअसल दिल्ली निवासी प्रवीण कुमार अग्रवाल की उस शिकायत पर दिया जिसमें ग्राहक ने कहा था कि उसने हॉटस्पॉट से सोनी एरिक्सन मोबाइल एवं चार्जर खरीदा जिसकी कीमत 12,600 रुपये थी। लेकिन कुछ ही दिनों में मोबाइल एवं चार्जर दोनों खराब हो गए। उन्हें वारंटी पीरियड में होने के बाद भी दूसरे चार्जर के लिए 450 रुपये अतिरिक्त अदा करने पड़े।
जबकि फोन को सोनी एरिक्सन के अधिकृत सर्विस सेंटर में देने के बाद भी यह सही नहीं हो पाया वहां से इसे पहले से भी ज्यादा खराब स्थिति में लौटाया गया। फोरम ने रिटेलर एवं सर्विस सेंटर को सेवाओं में कमी एवं ग्राहकों के हितों के साथ खिलवाड़ करने का दोषी पाया। आदेश जारी करते हुए फोरम ने कहा कि इस मामले में ग्राहक पूरी तरह से छला गया है। जिस कंपनी का फोन एवं चार्जर वह लिया, दोनों खराब थे।
चार्जर एक महीने में खराब हो गया एवं फोन चार महीने में जबकि दोनों वारंटी पीरियड में थे। इसका मतलब है कि निर्माता कंपनी फोन की गुणवत्ता के संबंध में जो दावा कर रही थी वह गलत था। यहां तक कि इसे सही करने के लिए कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क किया गया परंतु एक महीने तक रखने के बाद भी वह इसे सही नहीं कर पाया। इसलिए संबंधित रिटेलर, ग्राहक को 12,600 रुपये (फोन की कीमत), चार्जर के 450 रुपये के अलावा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट पहुंचाने के लिए मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये अलग से दे, ऐसा अदालत ने निर्देश दिया।