महंगाई ने सर्दियों में आम आदमी की कमर और ज्यादा तोड़ दी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि गत दिसंबर में खुदरा महंगाई दर लगातार तीसरे महीने बढ़ते हुए 10.56 फीसदी तक पहुंच गई है। इस दौरान सब्जियां सबसे ज्यादा करीब 26 फीसदी महंगी हो गई है। जबकि, खाद्य तेल के दाम भी करीब 17 फीसदी बढ़े हैं।
महंगाई की मार शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा पड़ी है। दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दर शहरों में 10.42 फीसदी थी, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह 10.74 फीसदी रही।
खुदरा महंगाई दर बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह सर्दियों के दौरान खाने-पीने की चीजों की बढ़ी कीमतें हैं। खाद्य तेल व वनस्पति की कीमतें भी करीब 17 फीसदी बढ़ी है। चीनी करीब 14 फीसदी महंगी हुई है। इसी तरह, दालों के दाम व अनाज करीब 13 फीसदी बढ़े हैं। मांस, मछली और अंडे की कीमतें भी करीब 12 फीसदी बढ़ गई हैं। महंगाई की मार सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक ही सीमित नहीं है। कपड़ों व जूतों पर भी करीब 11 फीसदी महंगाई है।
लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई बढ़ने से आम आदमी की कमर टूट रही है। उल्लेखनीय है कि खुदरा महंगाई दर गत नवंबर में 9.90 फीसदी और अक्तूबर में 9.75 फीसदी रही थी। लेकिन सर्दियों के दौरान महंगी सब्जियों और राशन ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। खुदरा महंगाई दर गत नवंबर में 9.90 फीसदी और अक्तूबर में 9.75 फीसदी रही थी।
आगामी 29 जनवरी को होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा में दहाई अंकों में जा पहुंची खुदरा महंगाई और काबू में आई थोक महंगाई को ध्यान में रखकर ही ब्याज दरों में कटौती पर कोई फैसला करेगा।
थोक महंगाई दर में कुछ नरमी
गत दिसंबर में थोक महंगाई दर तीन साल के न्यूनतम स्तर 7.18 फीसदी पर आ गई है। थोक मूल्य दिसंबर में 7.18 फीसदी रहा। यह दिसंबर 2009 के बाद पहली बार इतने निचले स्तर पर आया है। गत नवंबर में यह 7.24 फीसदी था और सर्दियों के असर से इसमें बढ़ोतरी की आशंका जाहिर की जा रही थी। हालांकि, खाने-पीने की चीजों के दाम थोक सूचकांक में भी बढ़े हैं। इस श्रेणी की मुद्रास्फीति 11.16 फीसदी रही। जबकि, नवंबर में यह 8.50 फीसदी थी। सूचकांक के घटकर तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ जाने से भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ गया है।