मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) जुटाने के लिए सरकार ने इसकी शर्तों में गुपचुप तरीके से ढील दे दी है। ऐसा संभवत: ब्रिटेन की दिग्गज रिटेल कंपनी टेस्को की राह आसान बनाने के लिए किया गया है।
नीति में हुए इस बदलाव के बाद मल्टी ब्रांड रिटेल के मौजूदा स्टोर में निवेश का रास्ता खुल गया है। इससे पहले एफडीआई के जरिए सिर्फ नए स्टोर खोलने की अनुमति थी, इससे मौजूदा स्टोर का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता था।
मल्टी ब्रांड रिटेल की एफडीआई नीति में हुए इन बदलावों का खुलासा आगामी 30 दिसंबर को होने वाली विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की बैठक में हो सकता है।
टेस्को ने टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट हाइपर मार्केट लिमिटेड में 11 करोड़ डॉलर का निवेश प्रस्ताव औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) को भेजा है। इसे 30 दिसंबर को एफआईपीबी की मंजूरी मिल सकती है।
डीआईपीपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब एफडीआई की नीति के तहत 50 फीसदी निवेश बैक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में करना अनिवार्य है।
यह पूरा निवेश नए ढांचे के निर्माण के लिए करना होगा। लेकिन बाकी 50 फीसदी निवेश नए स्टोर के अलावा मौजूदा स्टोर के लिए किया जा सकेगा।
12 जुलाई को डीआईपीपी की ओर से जारी स्पष्टीकरण में मल्टी बांड में एफडीआई के जरिए मौजूदा स्टोर के बजाय नए स्टोर खोलने पर जोर दिया गया था, लेकिन इसके बाद सरकार का रुख बदल गया।
गौरतलब है कि एफडीआई का पैसा मौजूदा स्टोर और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाने की पाबंदी के चलते वालमार्ट जैसी कंपनियां को भारतीय बाजार में उतरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भारती और वालमार्ट की साझेदारी टूटने के पीछे एक बड़ी वजह इस पुरानी शर्त को ही माना जा रहा है।