आम आदमी पर महंगाई की मार बढ़ती जा रही है। गत फरवरी में खुदरा मुद्रास्फीति लगातार पांचवे महीने बढ़ते हुए 10.91 फीसदी तक पहुंच गई है। महंगाई की चपेट में सबसे ज्यादा खाने-पीने की चीजें हैं, जिनके दाम करीब 14 फीसदी तक बढ़े हैं।
इस दौरान सब्जियां पिछले साल से करीब 21 फीसदी महंगी रहीं, जबकि अंडा, मांस और मछली के दाम भी 16 फीसदी ज्यादा रहे हैं। जनवरी में खुदरा महंगाई दर 10.79 फीसदी के स्तर पर थी।
सरकार ने जनवरी में थोक महंगाई दर तीन साल के न्यूतनम स्तर आने का दावा किया था, लेकिन थोक महंगाई की यह राहत आम जनता तक पहुंचती नहीं दिख रही है।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का कहना है कि खुदरा महंगाई को काबू आने में कुछ और महीनों का वक्त लगेगा। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के आंकड़े बृहस्पतिवार को जारी हो सकते हैं।
जनवरी में थोक महंगाई दर घटकर 6.6 फीसदी रहने के बाद ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ी थी, जिस पर फरवरी की खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा पानी फेर सकता है। बीते वर्ष नवंबर में खुदरा महंगाई दर 9.9 फीसदी थी। तब से महंगाई बढ़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ, थमने के बजाय हर महीने नई ऊंचाई छू रहा है।
फरवरी में अनाज करीब 17 फीसदी, खाद्य तेल व वनस्पति 14.5 फीसदी, दालें 12.4 फीसदी और चीनी 12 फीसदी महंगी हो गई। खाने-पीने की चीजों के अलावा कपड़ों और जूतों पर भी करीब 11 फीसदी महंगाई है।
गांव में शहरों से ज्यादा महंगाई
खुदरा महंगाई की मार गांव में शहरों से भी ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खुदरा महंगाई ग्रामीण इलाकों में 11 फीसदी से थोड़ी ज्यादा रही, जबकि शहरों में यह 10.84 फीसदी रही। इस सीधा मतलब यह है कि फरवरी में गांव-देहात में खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पिछले साल की अपेक्षा 11 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ा।