मल्टी ब्रांड रिटेल के तहत भारत में निवेश करने वाली वॉलमार्ट जैसी कंपनियों के लिए छोटे और मझोले कारोबारियों से खरीदारी करना आसान हो जाएगा। साल 2013-14 के बजट में यह प्रावधान कर दिया गया है कि जो छोटे और मझोले कारोबारी अपना कारोबार बढ़ाकर एमएसएमई सेक्टर से बाहर आ जाते हैं, वह भी अगले तीन साल तक सेक्टर के मिलने वाले लाभ का फायदा उठा सकेंगे।
तीन साल अतिरिक्त फायदा मिलने के प्रस्ताव से कारोबारियों के साथ मल्टी ब्रांड रिटेल एफडीआई के तहत भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को इसका बड़ा फायदा मिलने वाला है। मौजूदा नियमों के तहत मल्टी ब्रांड रिटेल के तहत भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को 30 फीसदी खरीदारी एमएसएमई सेक्टर से करना अनिवार्य है।
देश में एफडीआई के जरिए निवेश करने वाली कंपनियों ने सरकार से इस शर्त में सहूलियत देने की मांग की थी। कंपनियों के अनुसार वह बड़े पैमाने पर खरीदारी करेंगी। ऐसे में उनसे खरीदारी करने वाले कारोबारी जल्द ही बड़े कारोबारी वाले वर्ग में आ सकते हैं।
जिसके बाद उन कंपनियों के लिए 30 फीसदी खरीदारी की शर्त को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार इन मांगों के देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज के अध्यक्ष वीके अग्रवाल का कहना है कि विदेशी कंपनियां इस बात के लिए सरकार से कह रही थी कि उनके लिए 30 फीसदी का तय लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा। नए प्रावधान से कम से कम अगले तीन साल के लिए कंपनियों के लिए खरीदारी करना आसान हो जाएगा।