आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए रिजर्व बैंक अपनी आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के मुताबिक रिजर्व बैंक शुक्रवार को पेश होने वाली अपनी मौद्रिक समीक्षा में दरों में 0.25 फीसदी की कमी कर सकता है लेकिन आगे केंद्रीय बैंक के पास दरों में कटौती के सीमित अवसर रह सकते हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका एमएल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि रिजर्व बैंक बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को बढ़ाने के तहत सीआरआर में चौथाई फीसदी और ग्रोथ को प्रोत्साहित करने के लिए रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है।
मुख्य महंगाई दर में नरमी का रुझान बना रहा, तो रिजर्व बैंक जून, अक्तूबर और जनवरी में भी दरों में कमी कर सकता है। चालू वित्त वर्ष में मानसून के सामान्य रहने के पूर्वानुमान से रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति में नरमी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इसके बावजूद आने वाले दिनों में रिजर्व बैंक सतर्कता भरा रवैया भी अपनाए रखेगा, क्योंकि चालू वर्ष की दूसरी छमाही में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और बिजली की दरें बढ़ने से महंगाई में तेजी आने का अंदेशा है।
अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को देखते हुए उद्योग जगत की निगाहें भी रिजर्व बैंक की 3 मई को पेश होने वाली सालाना मौद्रिक समीक्षा पर टिकी हुई हैं। उद्योगों का भी मानना है कि रिजर्व बैंक दरों में कम से कम चौथाई फीसदी की कमी कर सकता है।
इससे पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन भी नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की उम्मीद जता चुके हैं।
पिछले शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा था कि रिजर्व बैंक के पास दरों में कमी करने का पर्याप्त अवसर है। महंगाई दर में नरमी आ रही और मानसून के भी सामान्य रहने का पूर्वानुमान है।