अक्षय ऊर्जा पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो सकती है। सब्सिडी समाप्त करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य अक्षय ऊर्जा को मुख्य ऊर्जा का हिस्सा बनाना है और बिजली उत्पादन में अक्षय ऊर्जा खासकर सोलर ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाना है। सब्सिडी की जगह सोलर परियोजना लगाने वाले डेवलपर्स के लिए ब्याज दरों में छूट का प्रावधान किया जा सकता है। अगले पांच साल में सरकार ने अक्षय ऊर्जा की उत्पादन क्षमता को एक लाख मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
बिजली, कोयला व नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक अक्षय ऊर्जा खासकर सोलर परियोजना की स्थापना के मामले में अब सब्सिडी से हटकर बात करनी होगी। सोलर परियोजना के लिए मिलने वाली सब्सिडी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव लाना होगा। वक्त आ गया है कि लोगों को इस मामले में अपनी सोच को बदलना चाहिए। गोयल के मुताबिक सोलर परियोजना से उत्पादित बिजली की लागत 16-17 रुपये प्रति यूनिट थी, जो घटकर 7 रुपये तक आ गई है।
सरकार सोलर परियोजना की स्थापना लागत को कम करने के लिए सोलर डेवलपर्स को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए विभिन्न बैंकों से बात कर रही है। सोलर परियोजनाओं के लिए अधिक से अधिक नगदी की उपलब्धता के लिए मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से संपर्क कर रहा है। इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार अगले साल फरवरी में अंतरराष्ट्रीय निवेश समिट भी करने जा रही है। सोलर क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार सोलर उत्पादन में निवेशकों का भरोसा पैदा करने के लिए कई अन्य कदम भी उठा रही हैं।
फिच रेटिंग इंडिया के निदेशक (ऊर्जा) सलील गर्ग के मुताबिक सोलर पर सब्सिडी खत्म करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। सब्सिडी समाप्त करने पर परियोजना की स्थापना बंद हो सकती है। सरकार तकनीक विकसित कर, ब्याज दरों में कटौती और ग्रिड पैरेटी लाकर सब्सिडी को कम जरूर कर सकती है।