भले ही नरेंद्र मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के का अभियान शुरू किया है, लेकिन विदेशी निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित करने में सरकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। भारत ‘कारोबार करने में सहूलियत’ की कैटेगरी में पिछले वर्ष की रैंकिंग से गिर कर 142 वीं रैँकिंग तक पहुंच गया है।
विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस 2015: गोइग बिआंड एफीसिएंसी शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के लिए थोड़ी बेहतर स्थिति यह है कि अल्पसंख्य निवेशकों (माइनॉरिटी इनवेस्टर) की सुरक्षा और कर्ज की उपलब्धता के लिहाज से भारत सातवें और 36 वें स्थान पर रहा है। सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के अनुरूप न सिर्फ भारत को 50 वें स्थान पर लाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, बल्कि उसे केंद्र और राज्य स्तर पर प्रमुख नीतिगत बदलाव और सुधार भी करने होंगे। तभी भारत के बारे में नकारात्मक धारणा को बदला जा सकेगा।
वास्तव में पिछले वर्ष विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत के स्थान को संशोधित कर 140 वां किया गया था। पिछले वर्ष रैँकिंग प्रकाशित किए जाने के समय भारत का स्थान 134 वां था। सामान्य रैंकिंग के अलावा डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 10 संकेतकों के जरिए यह भी बताती है कि तमाम देश बेस्ट परफार्मेंस के लक्ष्य से कितनी दूर हैं। 10 संकेतकों से डूइंग बिजनेस इंडेक्स बना है। डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2015 में डिस्टेंस टू फ्रंटियर पर भारत का स्कोर 53.97 है। 2014 में भारत का डिस्टेंस टू फ्रंटियर पर स्कोर 52.78 है। ज्यादा डिस्टेंस टू फ्रंटियर स्कोर का मतलब है कि देश आदर्श स्थिति के करीब है।
डूइंग बिजनेस इंडेक्स के 10 संकेतकों में कारोबार शुरू करना, निर्माण के लिए अनुमति, बिजली कनेक्शन हासिल करना, संपत्ति का पंजीकरण कराना, कर्ज मिलना, अल्पसंख्य निवेशकों के हितों की सुरक्षा करना, कर का भुगतान करना, सीमा पार कारोबार करना, कांट्रैक्ट लागू करना और समय पर कर्ज न चुकाने पर मामले को सुलझाना शामिल हैं। 2015 की रिपोर्ट में 1 जून 2013 और 1 जून 2014 के बीच देशों द्वारा किए गए 2,400 से अधिक नियामकीय सुधारों पर विचार किया गया है।
मोदी सरकार को रिपोर्ट में जताई गई चिंताओं जैसे कांट्रैक्ट लागू करने, कंसट्रक्शन परमिट और समय से कर्ज न चुका पाने के मामले को सुलझाने का निराकरण करना होगा। भारत में कांट्रैक्ट लागू करने तीन वर्ष आठ माह का समय लगता है, जबकि चीन में इसमें 1 वर्ष दो माह लगता है। मेक्सिको में कांट्रैक्ट लागू करने में 1 वर्ष से थोड़ा अधिक समय और रूस में एक वर्ष से कम समय लगता है। इसके लिहाज से सबसे बेहतर प्रदर्शन सिंगापुर का है। यहां कांट्रैक्ट लागू कराने में 150 दिन का समय लगता है।