मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर पर तैयार किए गए उद्योग संगठन फिक्की की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भले ही मैन्यूफैक्चरिंग ऑर्डर बुक में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। मगर इस ओर निवेश और नई नियुक्तियों की संभावना काफी कम है।
संगठन की ओर से किये गए सर्वे में शामिल ज्यादातर उद्यमियों ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादन में इजाफे और मांग वृद्धि की बात कही है। यानी वित्त वर्ष के अंतिम तीन माह में उत्पादकों के ऑर्डर बुक में सुधार हो रहा है।
मगर सर्वे में शामिल 74 फीसदी ने अगले छह माह में इस ओर क्षमता विस्तार को लेकर निवेश की कोई योजना नहीं बनाई है। 76 फीसदी उत्पादकों ने कहा है कि वे अगले तीन माह में कोई भी नई भर्ती नहीं करना चाहते हैं।
संगठन का कहना है कि तीसरी तिमाही में निर्यात परिदृश्य में सुधार की संभावना भले ही नजर आई थी। मगर चौथी तिमाही में यह फिर से धूमिल हो गई है।
मौजूदा तिमाही में 40 फीसदी ने पिछले साल की समीक्षाधीन अवधि की तुलना में निर्यात स्तर में सुधार की संभावना जताई है। मगर इससे पूर्व में किये गए सर्वे में 54 फीसदी ने तीसरी तिमाही की तुलना में इजाफे की उम्मीद जताई थी।
इस दौरान विशेष रूप से चमड़ा, कपड़ा, खाद्य उत्पाद और सीमेंट क्षेत्र से सकारात्मक संकेत मिले हैं। मगर ऑटोमोबाइल और पूंजीगत वस्तुओं के विकास दर में सुस्ती की आशंका भी व्यक्त की गई है।
संगठन का मानना है कि सरकार की ओर से पिछले कुछ माह में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों की बदौलत आने वाले महीनों में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
गौरतलब है कि सर्वे में शामिल 20 फीसदी उत्पादकों का यह भी मानना है कि वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में उत्पादन विकास दर घट सकता है।