डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर पड़कर 60 के स्तर से नीचे चला गया। बुधवार को आयातकों ने डॉलर की भारी मांग की, जिसके चलते रुपया 55 पैसे टूटकर 60.21 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
शेयर बाजारों में गिरावट से भी रुपये पर दबाव पड़ा। हालांकि, कारोबार के अंतिम क्षणों में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से रुपये को थोड़ी मजबूती जरूर मिली।
अंतर बैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपये में गिरावट के साथ 59.87 पर कारोबार शुरू हुआ। पिछले सत्र रुपया 59.66 पर बंद हुआ था। सत्र के दौरान यह 59.84 के उच्च स्तर तक गया लेकिन वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक रुझानों से रुपये में गिरावट शुरू हो गई और यह 60.39 के न्यूनतम स्तर तक लुढ़क गया।
आखिरी क्षणों में घरेलू मुद्रा को संभालने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा किए गए सांकेतिक हस्तक्षेप से इसमें कुछ सुधार आया और यह पिछले सत्र के मुकाबले 55 पैसे टूटकर 60.21 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
गत तीन दिनों में रुपया 82 पैसे कमजोर हो चुका है। गत 26 जून को रुपया 60.72 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर रहा था और सत्र में 60.76 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक गिरा था।
आईडीबीआई बैंक के ट्रेजरी हेड एनएस वेंकटेश का कहना है कि विदेशी बाजारों में डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ, जिसका असर रुपये के सेंटीमेंट पर भी पड़ा और इसमें गिरावट रही।
वहीं, शेयर बाजारों में गिरावट का दबाव भी घरेलू मुद्रा पर पड़ा हालांकि, निर्यातकों और विदेशी बैंकों की ओर से डॉलर की कुछ बिकवाली जरूर देखने को मिली।