बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ब्याज दरें घटाने के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बहुत तेजी से आगे नहीं बढ़ेगा और वह छोटे-छोटे कदम ही बढ़ाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई जून मध्य की अपनी मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में महज चौथाई फीसदी की कमी कर सकता है। मार्च 2014 तक मूल दर में कुल आधे फीसदी की ही कटौती किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि डीजल की कीमतें और बिजली की दरों में बढ़ोतरी के चलते 6.5 फीसदी के स्तर से बढ़ कर काफी ऊपर जा चुकी महंगाई दर में 2013 में 7.5 फीसदी के स्तर के आसपास ठहराव आ जाएगा।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिललिंच की अर्थशास्त्री इंद्राणी सेन ने कहा कि महंगाई में ठहराव आने पर आरबीआई 2014 तक ब्याज दर में आधे फीसदी तक की कटौती करेगा। बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा है कि ब्याज दरों को नीचे लाकर विकास दर को बढ़ावा देने के लिए नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर आने वाले समय में खासतौर पर ध्यान देगा।
रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक 3 मई को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है। इसके अलावा देश के अर्थ तंत्र में नकदी को बढ़ाने के लिए वह खुले बाजार के विकल्पों (ओपन मार्केट ऑपरेशंस) के जरिये वित्त वर्ष 2014 में 1.6 लाख करोड़ रुपये झोंक सकता है।
गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान देश की आर्थिक विकास दर के धीमे पड़ कर 15 तिमाहियों के सबसे निचले स्तर 4.5 फीसदी पर आ जाने पर आरबीआई ने बीते मंगलवार को रेपो दर में चौथाई फीसदी कटौती करते हुए इसे 7.75 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी के स्तर पर ला दिया है। रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिसपर देश के बैंक रिजर्व बैंक से अल्पावधि कर्ज लेते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल मध्य के बाद देश में कर्ज की ब्याज दरों में चौथाई फीसदी तक की कमी देखने को मिल सकती है, जबकि 2014 तक इसमें 0.75 फीसदी तक की कटौती किए जाने की उम्मीद रखी जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच फीसदी के करीब रहने वाली देश की आर्थिक विकास दर के वित्त वर्ष 2014 में सुधर कर 6 फीसदी के दायरे में पहुंच जाने की संभावना मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है। इनमें पहला कारक है अच्छी बाशि होना और दूसरा ब्याज कर्ज की दरों में कटौती।
रिपोर्ट में ग्लोबल अर्थव्यवस्था की विकास दर तीन फीसदी के दायरे में रहने की संभावना जताते हुए भारत में सरकार की ओर से सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों के चलते निवेश की धारणा में मजबूती आने की बात भी कही गई है।