फैक्टरिंग सेवाएं देने वाली एनबीएफसी को अब बैंकों से कर्ज
मिलना आसान हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी-फैक्टर्स कंपनियों
के नियमों को उदार कर दिया है। रिजर्व बैंक के नए नियमों के तहत, ऐसी
कंपनियां जिनके कुल कारोबार की आय में से 75 फीसदी हिस्सा फैक्टरिंग
गतिविधियों से आता है, वह एनबीएफसी फैक्टर्स कंपनी के तहत आ सकेंगी।
आरबीआई
ने इसके अलावा कहा है कि ऐसी कंपनियों के फाइनेंशियल एसेट में 75 फीसदी
हिस्सा फैक्टरिंग बिजनेस के जरिए होना चाहिए। आरबीआई ने इसके पहले
एनबीएफसी-फैक्टर्स कंपनियों के लिए 80 फीसदी सीमा तय की हुई थी। फैक्टरिंग
सेवाएं देने वाली कंपनियां प्रमुख रूप से निर्यातकों को एलसी (लेटर ऑफ
क्रेडिट) आदि पर फाइनेंस करने का काम करती हैं।