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वर्चुअल करेंसी पर आरबीआई ने तरेरी आंखें

Wed, 01 Jan 2014 11:10 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया में तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही वर्चुअल करेंसी बिटक्वाइन पर भारतीय रिजर्व बैंक की नजर है।
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रिजर्व बैंक पिछले कुछ महीनों में भारत में बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बिटक्वाइन को मनी लांड्रिंग और साइबर सुरक्षा के लिए जोखिम मान रहा है। इसको देखते हुए हाल ही में रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल न करने की लोगों को सलाह दी है।

ऐसे में आने वाले दिनों में रिजर्व बैंक इसके लिए नए दिशानिर्देश भी जारी कर सकता है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय और सेबी भी नजर रखे हुए हैं।

इसके पहले बिटक्वाइन और उसके जरिए बढ़ रहे खतरे को देखते हुए अमेरिका, चीन और फ्रांस भी अपने यहां नियमों को सख्त कर चुके हैं। ऐसे में अब आरबीआई के ऊपर भी इस तरह की कवायद करने का दबाव बड़ रहा है।
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खास तौर पर तब, जब बिटक्वाइन को रिजर्व बैंक खुद मनी लांड्रिंग और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है।

देश में कई वेबसाइट्स ने डिजिटल करेंसी बिटक्वाइन की बिक्री भी शुरू कर दी थी। रिजर्व बैंक की सलाह के बाद फिलहाल कई कंपनियों ने इसकी बिक्री को रोक दिया है।

वर्चुअल करेंसी बिटक्वाइन की शुरुआत साल 2009 में हुई थी, जो कि अब धीरे-धीरे इतनी लोकप्रिय हो गई कि इसकी एक यूनिट की कीमत एक हजार डॉलर के बराबर पहुंच गई थी। यानी, एक बिटक्वाइन का मूल्य करीब 60 हजार रुपये तक पहुंच गया था।

क्या है बिट क्वाइन
यह एक वर्चुअल करेंसी है। यानी यह डिजिटल रूप में ही उपलब्ध है। इसके किसी सेंट्रल बैंक की तरफ से नहीं जारी किया जाता है। यह ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के जरिए जारी की जाती है।
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बिटक्वाइन बेचने वाली वेबसाइट पर आपको अपनी जानकारी देने के बाद आपका खाता खुल जाता है। जिस पर अपने लेन-देन कर सकते हैं। ऐसे में इसके बदले में फर्जी वेबसाइट भी काफी शुरू हो गई है।
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