रिजर्व बैंक ने बैंकों से लागत के आधार पर बेस रेट या कर्ज की न्यूनतम दर की समीक्षा हर तीन माह में करने को कहा है।
बैंक को इसके लिए अपने बोर्ड या असेट लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी की मंजूरी लेनी होगी।
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बैंकों को परिचालन में ज्यादा स्वतंत्रता देने के नजरिए से बैंकों को बेस रेट तय करने के तरीके की समीक्षा हर तीन साल में करने की अनुमति दे दी है। मौजूदा समय में इसके लिए पांच वर्ष की अवधि निर्धारित है।