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आर्थिक विकास पर भी दे ध्यान रिजर्व बैंक: चिदंबरम

Mon, 29 Jul 2013 09:30 PM IST
अहमदाबाद/एजेंसी
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रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा से एक दिन पहले वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि रिजर्व बैंक का कार्य न केवल महंगाई को काबू में करना है, बल्कि आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है।
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वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें कमर्शियल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि उनके पास कर्ज की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त फंड है और बड़े निवेश वाली परियोजनाएं लाने की जिम्मेदारी उद्योग पर है।

चिदंबरम ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया भर में सोच बदल रही है। केंद्रीय बैंक को सिर्फ महंगाई दर के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए। केंद्रीय बैंक के अधिकार को व्यापक परिदृश्य में रखकर देखा जाना चाहिए जिसमें मूल्य स्थिरता, आर्थिक वृद्धि और रोजगार के अवसर का सृजन करना भी शामिल है।
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वित्त मंत्री चिदंबरम का यह बयान रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा से एक दिन पहले आया है। माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक इस समीक्षा में भारी उतार-चढ़ाव से गुजर रही विनिमय दर, नकदी का संकट और विकास दर में सुस्ती जैसे कई मुद्दों पर विचार करेगा।

चिदंबरम ने कहा कि रिजर्व बैंक की मूल्य स्थिरता से जुड़ी जिम्मेदारी को हम स्वीकार करते हैं, लेकिन मूल्य स्थिरता को उसके आर्थिक वृद्धि और रोजगार बढ़ाने के व्यापक अधिकार क्षेत्र का एक हिस्सा माना जाना चाहिए। पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री चिदंबरम से मुलाकात की और समझा जाता है कि उन्होंने मौजूदा आर्थिक हालातों पर चर्चा की।

वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि दुनिया भर में सरकारें और केंद्रीय बैंक एक ही तरीके से नहीं सोचती हैं। चिदंबरम ने कहा कि दरअसल, केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच यह प्रतिरोध व्यावहारिक है, यह एक तरह से स्वस्थ प्रतिरोध है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह गलत है, यह शायद स्वस्थ टकराव है। रिजर्व बैंक उद्योगों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की मांग और विकास दर को लेकर सरकार के दबाव के बावजूद सख्त मौद्रिक नीति का रुख अपनाए हुए है।
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