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रतन टाटा v/s साइरसः शख्सियतें दो, तेवर कितने अलग?

Tue, 28 May 2013 12:52 AM IST
मुंबई/नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
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दिसंबर में रतन टाटा से टाटा समूह की बागडोर साइरस मिस्त्री के हाथ आने के करीब छह माह बाद उद्योग व कारोबार जगत से जुड़े लोगों को टाटा समूह की कार्यशैली में बदलाव की शुरुआत होती दिखने लगी है।
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यह बदलाव रतन और साइरस के व्यक्तित्व और कामकाज के ढंग में खासा फर्क होने के चलते आ रहा है।

स्वभाव और व्यवहार में जहां रतन टाटा लोगों से खुल कर बातचीत करने और हंसी-मजाक पसंद करने वाले व्यक्ति थे, वहीं साइरस कंपनी की बोर्ड मीटिंगों में शांत और गंभीर मुद्रा में दिखाई देते हैं।

समूह के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के आखिरी दशक में जहां रतन टाटा ने ढेरों विलय-अधिग्रहण (एमएंडए) सौदों के जरिये कारोबार को ग्लोबल स्तर पर फैलाया, वहीं उनसे बागडोर संभालने के बाद साइरस मिस्त्री का ध्यान मुख्यत: दुनिया भर में फैल गए समूह के सारे कारोबार को समेकित (कंसॉलिडेट) कर किफायती ढंग से संचालित करके बेहतर से बेहतर नतीजे हासिल करने पर केंद्रित है।
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रतन टाटा और साइरस मिस्त्री की कार्यशैली में का जिक्र करते हुए दोनों को जानने वाले और टाटा समूह से जुड़े उच्च पदस्थ लोगों का कहना है कि जेनेवा मोटर शो जैसे ग्लोबल आयोजनों में रतन टाटा जिस उत्साह के साथ हिस्सा लेते थे और बाद में पत्रकारों व उद्योग जगत की हस्तियों के साथ हंसी-मजाक करते व बतियाते नजर आते थे, साइरस मिस्त्री का मिजाज उससे काफी हद तक विपरीत है।

साइरस कंपनियों की बैठकों व सार्वजनिक अवसरों पर काफी हद तक खुद में सीमित और खामोश नजर आते हैं। टाटा समूह की एक कंपनी के निदेशक दोनों की तुलना करते हुए कहते हैं कि रतन टाटा काफी सुनियोजित व लक्ष्य केंद्रित होने के साथ-साथ दूसरों की बातों को सुनने व स्वीकार करने वाले व्यक्ति थे।

वह बोर्ड मीटिंगों के दौरान खुलकर बहस व सवाल-जवाब किया करते थे, जबकि साइरस मीटिंग के दौरान शांत रह कर अधिकारियों को आपस में तर्क-वितर्क करने देते हैं और अंत में ठोस निर्णय के रूप में अपनी बात कहते हैं।

सूत्रों के मुताबिक साइरस का ध्यान फिलहाल रतन टाटा द्वारा खरीदी गई तमाम विदेशी कंपनियों के कारोबार को कंसॉलिडेट करने पर केंद्रित है।

साथ ही आर्थिक दबाव के इस दौर में वह मितव्ययता के साथ कम से कम खर्च में कारोबार का संचालन कर नतीजों को बेहतर बनाकर कंपनियों की आय बढ़ाने को भी ध्यान में रख कर चल रहे हैं।
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