प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अर्थव्यवस्था की तेजी फिर से लौटने का भरोसा है। उनका कहना है कि हाल में लिए गए फैसले अर्थव्यवस्था को सुधारने की दिशा में शुरुआत भर हैं। आने वाले दिनों में सरकार कुछ और कड़े कदम उठा सकती है। प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के रास्ते में अत्यधिक निराशावाद को बड़ी बाधा करार देते हुए विपक्ष की विचारधारा से देश को आगाह किया है।
सरकार की आर्थिक नीतियों का लगातार विरोध कर रही भाजपा और वाम दलों पर निशाना साधते हुए मनमोहन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए हमें राजनीतिक तौर पर कई कठिन फैसले लेने पड़े हैं। जो लोग रिटेल में एफडीआई जैसे फैसलों का विरोध कर रहे हैं वे दुनिया की हकीकत से अनजान हैं या फिर पुरानी पड़ चुकी विचारधारा से बंधे हुए हैं। प्रधानमंत्री शनिवार को औद्योगिक संगठन फिक्की की 85वीं सालाना आम सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को फिर से 8-9 फीसदी की ऊंची विकास दर के रास्ते पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है। आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम विनिवेश प्रक्रिया में तेजी लाएंगे। सरकार बैंकिंग कानूनों में बदलाव और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करना चाहती है। इनके अलावा डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) और गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के मामले भी प्राथमिकता में हैं।
फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम
प्रधानमंत्री ने सब्सिडी के बढ़ते बोझ और राजकोषीय घाटे पर चिंता जाहिर करते हुए आने वाले दिनों में ईंधन के दाम बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। उनका कहना है कि बिजली और पेट्रोलियम पदार्थों के कम दाम सरकार के संसाधनों को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर जितना खर्च करती है, उससे ज्यादा तेल सब्सिडी का खर्च है। गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए हमें इस मसले को हल करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधार के जरिए नकद भुगतान से भ्रष्टाचार और सब्सिडी के दुरुपयोग को कम करने में मदद मिलेगी जबकि सरकारी फायदे सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सकेंगे।