भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और फिक्की ने ईंधन सब्सिडी को कम करने के लिए केलकर समिति की सिफारिशों को यथाशीघ्र लागू करने का सुझाव प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष सी रंगराजन के समक्ष पेश किया है। सीआईआई के अध्यक्ष एडि गोदरेज ने कहा है कि मौजूदा समय में ऐसे नीतिगत उपाय पेश करने की जरूरत है जिससे बाजार में सकारात्मक संदेश जाए। उन्होंने कहा कि उद्योगों और अर्थव्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। निवेश में कमी लगभग सभी क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रुप से नजर आ रही है। ऐसे में कारोबारी आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है।
पीएमईएसी को दिए गए सुझाव में सीआईआई ने कहा है कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सरकार को अगले तीन साल में चरणबद्ध तरीके से डीजल सब्सिडी में कटौती की संभावना तलाशना चाहिए। फिक्की के उपाध्यक्ष सिद्धार्थ बिरला ने भी मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर चिंता जाहिर करते हुए केलकर समिति के सुझाव लागू जल्द करने की पेशकश की है।
सीआईआई ने कहा है कि सरकार को उत्पाद और सेवा कर में कटौती के साथ प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान भी करना चाहिए। संगठन ने उम्मीद जताई है कि आगामी बजट में सीमा शुल्क को 10 फीसदी पर बरकरार रखा जाएगा। इंटरेस्ट रेट सबवेंशन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसका लाभ 25 लाख की जगह 35 लाख रुपए कीमत वाली आवासीय परियोजनाओं के लिए करने की सिफारिश भी की गई है। संगठन ने जीएसटी को यथाशीघ्र लागू करने के लिए हर संभव प्रयास करने का सुझाव भी दिया है।
सीआईआई का कहना है कि आरबीआई को रेपो दर में 50 आधार अंकों की कमी और सीआरआर में कटौती करनी चाहिए। वहीं केंद्रीय योजनाओं के समेकन का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा अगले वर्ष विनिवेश के जरिए 50 हजार करोड़ रुपए उगाही का लक्ष्य रखने की सलाह भी दी गई है। दूसरी ओर फिक्की ने अपने सुझाव में कहा है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक के अधर में लटके होने के कारण औद्योगिकरण और निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वहीं बिजली की कमी उद्योगों के लिए चिंता का सबब बन चुकी है। इसलिए बिजली परियोजनाओं के लिए कोल लिंकेज की व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए।