तेल कंपनियों द्वारा डीजल के थोक दामों में की गई भारी वृद्धि चलते रेलवे पर एक साल में लगभग 2700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे रेलवे के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। रेलवे देश में कारपोरेट क्षेत्र का सबसे बड़ा डीजल उपभोक्ता है।
ट्रेनों के संचालन के लिए वह हर साल लगभग 250 करोड़ लीटर डीजल विभिन्न तेल कंपनियों से खरीदता है। डीजल का थोक मूल्य बढ़ने से रेलवे को अब डीजल खरीद पर 10.80 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। आर्थिक संकट से जूझ रहे रेलवे के लिए यह वृद्धि काफी भारी पड़ेगी।
गौरतलब है कि एक हफ्ते पहले ही रेल मंत्री ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए यात्री किराये में वृद्धि की घोषणा की थी। यात्री किराये में बढ़ोतरी से रेलवे को सालाना लगभग 6000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ किराया 21 जनवरी से लागू होगा जबकि डीजल के दामों में की गई वृद्धि तत्काल प्रभाव (18 जनवरी) से लागू हो गई है। इससे सवाल उठने लगा है कि क्या बजट के दौरान या उसके कुछ दिन बाद रेलवे क्या फिर किराया बढ़ाने के लिए मजबूर होगा।