केंद्र सरकार केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों को सोलर पार्क या सोलर के अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (यूएमपीपी) लगाने की इजाजत दे सकती है।
बिजली मंत्रालय का मानना है कि ऐसा करने से 2020 तक सोलर की उत्पादन क्षमता को एक लाख मेगावाट तक ले जाने के लक्ष्य को हासिल करना आसान होगा।
बिजली मंत्रालय की तरफ से इस मामले में एक कैबिनेट नोट भी जारी किया गया है। इस नोट पर अन्य मंत्रालयों की राय मांगी गई है।
बिजली मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियां राज्य सरकार या सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ मिलकर सोलर पार्क या सोलर यूएमपीपी की स्थापना कर सकती है।
बिजली मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियां और राज्य के ज्वाइंट वेंचर के तहत बनने वाली सोलर यूएमपीपी से उत्पादित बिजली के ट्रांसमिशन के लिए प्रशासनिक स्तर पर दोनों के बीच एक योजना होनी चाहिए ताकि परियोजना की स्थापना और बिजली आपूर्ति करने की व्यवस्था में कोई अंतर नहीं रह जाए।
यानी, सोलर यूएमपीपी की स्थापना के साथ इससे उत्पादित बिजली को निकालने के लिए भी दोनों के बीच तालमेल होना चाहिए।बिजली मंत्रालय के प्रस्ताव में सोलर पार्क की स्थापना के लिए एक केंद्रीकृत मौसम निगरानी स्टेशन स्थापित करना है।
ताकि सोलर पार्क डेवलपर को मौसम के बारे में पूरी जानकारी रहे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने कहा है कि प्रस्तावित सोलर पार्क का विकास सोलर पार्क स्कीम के तहत किया जाना चाहिए वहीं, सोलर यूएमपीपी के लिए कुछ निश्चित ग्रिड कनेक्टिविटी का स्टैंडर्ड तय किया जाना अनिवार्य होना चाहिए।
वर्ष 2013 में सीईए ने ग्रिड कनेक्टिविटी स्टैंडर्ड जारी किया था। सीईए ने यह भी कहा है कि सोलर पार्क से उत्पादित बिजली की वजह से ग्रिड कनेक्टिविटी पर पड़ने वाले असर की समीक्षा करने की भी आवश्यकता है।
इस अध्ययन से ग्रिड को संतुलन रखने में मदद मिलेगी। पूर्व में राजस्थान में प्रस्तावित सोलर यूएमपीपी में भी केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों की तरफ से निवेश करने का प्रस्ताव था।