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हवाई साबित न हो जाए यूपी में 9 एयरपोर्ट बनाने का दावा

Tue, 02 Jul 2013 04:57 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
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उत्तर प्रदेश में बिजनौर, मुजफ्फरनगर से लेकर आजमगढ़ तक कम लागत के नौ एयरपोर्ट बनाने का दावा हवा-हवाई साबित हो सकता है।
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सिर्फ 55-60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर और बिजनौर में एयरपोर्ट बनाने की राह आसान नहीं है।

नागर विमानन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का मानना है कि एक सलाहकार फर्म ने जमीनी हकीकत जाने बगैर अकेले पश्चिमी यूपी में 7 एयरपोर्ट बनाने का सुझाव दिया है, जिसे योजना आयोग ने आगे बढ़ा दिया है। जल्द ही नए एयरपोर्ट की इस सूची में फेरबदल हो सकता है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष वीपी अग्रवाल का कहना है कि अगर यात्रियों की संख्या पर्याप्त हो तो 150 किलोमीटर से कम दूरी पर भी दो एयरपोर्ट बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए एयरपोर्ट की उपयोगिता साबित होनी चाहिए।
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पश्चिमी यूपी में 7 एयरपोर्ट की जरूरत के बारे में उनका कहना है कि पहले मेरठ, मुरादाबाद, बरेली और आगरा की मौजूदा हवाई पट्टियों को विकसित किया जाएगा।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुनियादी ढांचे से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा करते हुए देश में कुल 51 नए एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य दिया है। केंद्र सरकार के तमाम दावों के बावजूद यूपी में 7 मौजूदा हवाई पट्टियों के विकास की योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। ऐसे में 9 नए एयरपोर्ट बनाने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

कैसे चलेंगे 400 किलोमीटर में 7 एयरपोर्ट
इसे नागर विमानन मंत्री अजित सिंह की सियासी उड़ान समझें या फिर प्रधानमंत्री की यूपी पर मेहरबानी, लेकिन सहारनपुर से आगरा के बीच 400 किलोमीटर से भी कम दूरी में 7 एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य हवा-हवाई साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यूपी में 9 नए एयरपोर्ट बनाने का जिम्मा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को सौंपा गया है। अथॉरिटी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो बिजनौर, सहारनपुर, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर की दूरी दिल्ली से बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में पश्चिमी यूपी में 7 एयरपोर्ट बनाना व्यावहारिक नहीं लगता।

कैसे होंगे कम लागत के एयरपोर्ट
केंद्र सरकार देश में कम लागत के एयरपोर्ट पर छोटे विमानों के साथ क्षेत्रीय एयरलाइनों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। एएआई के अध्यक्ष ने बताया कि कम लागत वाले हवाई अड्डों पर यात्रियों को अपेक्षाकृत कम सुविधाएं मिलेंगी।
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इन्हें बनाने और यहां से उड़ान संचालित करने का खर्च भी कम आएगा, जिससे छोटे शहरों के बीच उड़ानों का संचालन संभव हो पाएगा। यात्रियों की कमी की वजह से ज्यादातर एयरलाइंस छोटे शहरों का रुख करने से कतराती हैं।
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