प्राकृतिक आपदा से किसानों की उपज को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने अब फसलों का बीमा करने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी सौंप दी है।
इसके तहत लगभग आधा दर्जन से अधिक निजी क्षेत्र की कंपनियों को इस योजना से जोड़ा गया है। इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम केंद्र के अन्य फ्लैगशिप कार्यक्रमों की तर्ज पर चलाया जाएगा।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय ध्वजवाहक योजनाओं की तर्ज पर सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम नाम से नयी योजना शुरू की है। इसके तहत संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना यानी एमएनएआईएस को पूरे देश में लागू किया जाएगा।
एमएनएआईएस अभी उत्तर प्रदेश और बिहार के 11 जिलों में ही चल रहा है। जबकि राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम लागू होने पर इन दोनों राज्यों के सभी जिलों में एमएनएआईएस लागू हो जायेगा।
नए फसल बीमा कार्यक्रम में ओलावृष्टि और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदा से अगर फसल बरबाद होती है तो एकल किसानों को भी बीमा का लाभ मिल सकेगा।
इस नई योजना की जिम्मेदारी सरकार ने आधा दर्जन से अधिक निजी बीमा कंपनियों को सौंपी है। इसके तहत कर्ज लेने वाले किसानों की फसल का बीमा अनिवार्य कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि कृषि मंत्रालय ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चलने वाले राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम की अधिसूचना एक नवंबर को जारी कर दी है। लेकिन पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों की प्रक्रिया जारी रहने के कारण अभी इसे औपचारिक तौर पर शुरू नहीं किया गया है।
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम को चालू कृषि वर्ष के रबी सत्र में लागू कर दिया गया है। यह कार्यक्रम देश भर में लागू हो गया है। लेकिन दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनावों के चलते इस योजना का लाभ यहां के किसानों को चुनाव तक नहीं मिल सकेगा।