बिजली उत्पादन में आड़े आ रही कोयले की कमी को ध्यान में रखते हुए सरकार की तरफ से आगामी दिसंबर महीने से कोयला ब्लॉक की नीलामी शुरू किए जाने की पूरी संभावना है। इस दिशा में कोयला मंत्रालय की तरफ से 74 कोयला ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया की मंजूरी के लिए कैबिनेट नोट जारी किया गया है। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न कंपिनयों के 204 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द किए जाने के बाद यह सभी ब्लॉक वर्ष 1993 से 2004 के बीच आवंटित किए गए थे।
मंगलवार को इस मामले में अंतर-मंत्रालयी पैनल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें फिलहाल 74 कोयला ब्लाकों की नीलामी के लिए कैबिनेट नोट जारी करने की मंजूरी दी गई। बैठक में कोयला ब्लॉक की नीलामी के लिए सुरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) को निर्धारित करने के तरीकों पर विचार किया गया। पैनल में कोयला, बिजली, वित्त, पेट्रोलियम, खान, कानून व औद्योगिक नीति विभाग के सचिव स्तरीय अधिकारी शामिल हैं।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सुरिक्षत मूल्य तय करने के तरीकों पर कैबिनेट की मुहर जरूरी है और इसके बाद ही यह प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। सूत्रों के मुताबिक 74 कोयला ब्लॉकों में 42 ऐसे ब्लाक हैं, जिनसे उत्पादन शुरू हो चुका है और 32 ऐसे ब्लॉक हैं, जिनसे जल्द ही उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक इन ब्लाकों को नीलामी के लिए पहले इसलिए चुना गया, क्योंकि इन ब्लाकों से उत्पादन के लिए कंपिनयों को कोई मशक्कत नहीं करनी होगी और इनकी नीलामी प्रक्रिया पूरी होते ही कोयले का उत्पादन शुरू किया जा सकता है। पैनल द्वारा इस बात पर भी विचार किया गया कि ब्लॉक का सुरिक्षत मूल्य किसी भी कीमत पर इतना अधिक नहीं हो कि कोयले की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो जाए और इसकी कीमत उपभोक्ता को बिजली की बढ़ी हुई दरों के रूप में चुकानी पड़े।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट नोट को विभिन्न मंत्रालयों से परामर्श के लिए भेजा गया है। उनकी सलाह के तुरंत बाद अंतिम नोट को कैबिनेट में पेश कर दिया जाएगा। इस काम के लिए औपचारिक रूप से कोई समय सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि दिसंबर मध्य तक सुरक्षित मूल्य निर्धारित करने के तरीके तय कर लिए जाएंगे।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक पिछली सरकार में कोयला ब्लॉकों की नीलामी के लिए सुरिक्षत मूल्य तय करने केलिए क्रिसिल को सलाहकार नियुक्त किया गया था। सूत्रों के मुताबिक पैनल की बैठक में इस मामले में क्रिसिल की रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। अंतर-मंत्रालयी पैनल का गठन भी पिछली सरकार द्वारा वर्ष 2012 में की गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 204 कोयला ब्लॉक के आवंटन को रद्द किए जाने केबाद इन ब्लाकों पर निर्भर रहने वाले पावर प्लांट को बिजली की बिक्री केलिए अनुबंध के आधार पर समझौता करना पड़ सकता है।
देश में कोयले की मांग के मुताबिक उत्पादन में कमी से कोयले का आयात लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि हाल ही में बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने देश को कोयला उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर करने की जरूरत जताई है। उनका मानना है कि कोयला उत्पादन के वर्तमान 49 करोड़ टन के स्तर को दोगुना तक किया जा सकता है। उनका मानना है कि देश को कोयला का निर्यातक बनना चाहिए।