केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग को आंशिक तौर पर नियंत्रण मुक्त करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही चीनी मिलों को अपनी मर्जी से खुले बाजार में चीनी बेचने की छूट मिल सकती है।
हालांकि, चीनी उद्योग लंबे समय से लेवी कोटे की बाध्यता खत्म करने की मांग भी कर रहा है लेकिन पहले चरण में सरकार सिर्फ खुले बाजार में बेचने की छूट ही देगी। इस बारे में खाद्य मंत्रालय ने एक कैबिनेट नोट तैयार किया है।
केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस का कहना है कि रंगराजन समिति की सिफारिशों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर काफी विचार किया गया है। उन्हें भरोसा है कि अगले 15 दिनों के भीतर चीनी को नियंत्रण मुक्त करने संबंधी मुद्दों पर कोई निर्णय किया जाएगा। गौरतलब है कि गत अक्तूबर में रंगराजन समिति ने अपनी रिपोर्ट में लेवी कोटे की बाध्यता और रिलीज मैकेनिज्म को समाप्त करने की सिफारिश की है।
समिति ने गन्ने के मूल्य निर्धारण और चीनी के आयात-निर्यात को लेकर भी कई सुझाव दिए हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार शुरुआत में चीनी उद्योग को आंशिक तौर पर नियंत्रण मुक्त करना चाहती है। इस बाबत एक कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है, जिस पर अन्य मंत्रालयों के सुझाव लिए जा रहे हैं।
इस नोट में रिलीज मैकेनिज्म के अलावा चीनी के निर्यात से जुड़ी सिफारिशों को भी शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि गन्ने का दाम तय करने के मुद्दे पर किसान संगठनों की ओर से रंगराजन समिति की सिफारिशों का काफी विरोध किया जा रहा है। ऐसे में मंत्रालय गैर विवादित बिंदुओं पर सहमति बनाकर आगे बढ़ने का फैसला कर सकती है।