चुनावों की दस्तक एक बार फिर किसानों पर यूपीए सरकार को मेहरबान कर सकती है। सरकार कृषि ऋण माफी योजना में पात्र होते हुए भी वंचित रह गए किसानों के कर्ज माफ कर सकती है।
मंत्रालय स्तर पर इसकी कवायद भी शुरू हो चुकी है। वित्त मंत्रालय ने सभी अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों, कोऑपरेटिव बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से योजना के लाभ से वंचित रह गए किसानों की सूची तैयार करने को कहा है।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कृषि ऋण माफी योजना में कैग द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है।
इसके तहत यह बात भी सामने आई है कि बहुत से पात्र किसानों को योजना का लाभ नहीं मिला है। इसे देखते हुए मंत्रालय ने संबंधित बैंकों को कहा है कि वह ऐसे किसानों की सूची तैयार करें, जो कि पात्र होते हुए कर्ज माफी योजना का लाभ नहीं उठा सके हैं।
अधिकारी के अनुसार जांच में यह बात सामने आ रही है कि बहुत से ऐसे किसानों के कर्ज माफ हुए हैं, जो कि पात्र नहीं थे। ऐसे में बैंकों को उनसे रिकवरी करने के भी निर्देश दे दिए गए हैं। जहां तक वंचित रहे किसानों की बात है, तो मंत्रालय पूरी सूची बनाकर सरकार को सौंप देगा। मौजूदा रूप में अभी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि वंचित किसानों को बैंक खुद योजना का लाभ दे सकें।
इसके पहले भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट में कर्ज माफी योजना में घोटाले की बात सामने आईं थी। रिपोर्ट के अनुसार 52,516 करोड़ रुपये की कर्ज माफी योजना को लागू करने में कई सारी अनियमितताएं की गई हैं।
कैग के अनुसार कुल जांचे गए 90,576 मामलों में से 22.32 फीसदी मामलों में योजना को लागू करने में हेराफेरी की गई है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों, माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं की मिलीभगत के अलावा वित्त मंत्रालय के विभाग डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाए थे। जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने सभी 4.29 करोड़ मामलों को नए सिरे से जांचने के निर्देश दे दिए थे।
क्या थी योजना
मई 2008 में सरकार ने कृषि ऋण माफी योजना शुरू की थी, जिसके तहत विभिन्न शर्तों के तहत किसानों द्वारा लिए गए प्रत्यक्ष कृषि कर्ज को माफ किया गया था। जिसमें सीमांत, छोटे और दूसरे किसानों के वर्ग तय किए थे।
इस आधार पर बैंकों द्वारा 31 मार्च 2007 तक के स्वीकृत कर्ज को प्रमुख रूप से माफ किया गया था। हालांकि, इसमें एक अप्रैल 1997 से पहले लिए गए कर्ज नहीं शामिल थे।