केंद्र सरकार राज्य विद्युत बोर्ड (डिसकॉम) के लिए एक अप्रैल 2013 से रेटिंग प्रणाली शुरू करने जा रही है। इसके तहत कंपनियां अपनी रेटिंग करा सकेंगी। जिससे वित्तीय संस्थानों के लिए डिसकॉम को कर्ज देने से पहले उनकी वित्तीय स्थिति की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
कर्ज में डूबे डिसकॉम की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस समय देश के वित्तीय संस्थानों ने उन्हें कर्ज देना लगभग बंद कर दिया है। वित्तीय हालत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने साल 2012 में 2,46,000 करोड़ रुपये का कर्ज पुनर्गठन पैकेज की घोषणा की थी।
शुक्रवार को डिसकॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने और भविष्य में उन्हें कर्ज देने के लिए वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित प्रणाली देने की कवायद विद्युत मंत्रालय ने की है। इसी के तहत विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों के साथ बैठक की है। बैठक के बाद सिंधिया ने संवाददाताओं को बताया कि रेटिंग के जरिए वित्तीय संस्थानों को डिसकॉम की वित्तीय स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
जिससे उनके कर्ज पर जोखिम भी कम होगा। रेटिंग प्रणाली एक अप्रैल 2013 से उपलब्ध होगी। इसके लिए इकरा और सीएआरई को प्रणाली तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। सितंबर 2012 में केंद्र सरकार ने कर्ज में डूबी डिसकॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए 2,46,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया था। जिसके इस्तेमाल के लिए कंपनियों को अपनी बिजली की दरों में बढ़ोतरी करना भी प्रमुख है।
अभी तक केवल पांच राज्यों की डिसकॉम ने पैकेज से जुड़ने की बात कही है। जिसके तहत उत्तर प्रदेश, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, हरियाणा ने शामिल होने की मंजूरी दी है। जिस पर अगले हफ्ते वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल सकती है।