डाकघर की लघु बचत योजनाओं और पीपीएफ पर ब्याज दरों में कटौती को वाजिब बताते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि सही मायने में अभी भी डाकघर की बचत योजनाएं जमाकर्ताओं के लिए लाभकारी हैं।
सरकार ने पीपीएफ सहित डाकघर की तमाम लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 0.1 फीसदी की मामूली कमी की है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।
अहलूवालिया ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वास्तविक रूप में देखा जाए, तो दो साल पहले की तुलना में महंगाई दर काफी नीचे आ गई है। इसलिए, ब्याज दरें अभी भी बेहतर हैं। सरकार के इस कदम से ऐसा नहीं है कि डाकघर के जरिए जमाकर्ताओं को मिलने वाला ब्याज देश के अन्य वित्तीय व्यवस्था के जरिए मिलने वाले ब्याज के मुकाबले पूरी तरह अतार्किक हो जाएगा।
अहलूवालिया का कहना है कि सरकार ने मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ही छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें घटाई हैं। वित्त मंत्रालय ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती का यह फैसला श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के आधार पर किया है।
समिति ने लघु बचत पर रिटर्न को बाजार दरों से जोड़ने का सुझाव दिया था। वित्त मंत्रालय का कहना है कि सरकार अभी भी छोटे निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। हाल के दिनों में सरकारी प्रतिभूतियों की दरें लघु बचत योजनाओं के मुकाबले काफी तेजी से गिरी हैं।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ. वीएस व्यास का कहना है कि हाल के दिनों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में जिस तरह की कटौती की है, उस संकेत को मानते हुए लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में भी संशोधन होना ही था।
बचत योजनाओं के रिटर्न बाजार दरों के अनुकूल होने चाहिए। इस फैसले से आम आदमी की बचत पर बुरा असर पड़ने की आशंका को नकारते हुए व्यास ने कहा कि अगर बाजार में तरलता बढ़ी तो ब्याज दरों में मामूली कमी के बावजूद इन बचत योजनाओं में निवेश बढ़ेगा।