बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकारी विभागों और राज्यों पर दबाव बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओइएफ) के तहत आने वाली विभिन्न संस्थाओं के लिए मंजूरी देने की समय सीमा तय करने का फैसला किया है।
इसके तहत पर्यावरण मंजूरी, वाइल्डलाइफ क्लियरेंस पर राज्य सरकारों के लिए समय सीमा तय करने के साथ इससे जुड़े मुद्दों के बारे में सूचनाएं सार्वजनिक भी की जाएंगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और इंडस्ट्री के अनुकूल बन सके।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) प्रोजेक्ट की प्रगति और इससे जुड़ी मंजूरी पर नजर रख रहा है। पीएमओ का प्रयास है कि प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी मांगने की पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाए। भारत भूमि अधिग्रहण, राज्य और केंद्र स्तर पर विभिन्न मंजूरी हासिल करने में देरी को लेकर वैश्विक निवेशकों की आलोचना का सामना कर रहा है।
पीएमओ ने प्रोजेक्टों के लिए पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज करने के लिए संबंधित संस्थाओं से तय समय सीमा का पालन करने को कहा है।
यह फैसला किया गया है कि फॉलोअप के तौर पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और स्टेट लेवल एनवायर्नमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) को आवेदक से 45 दिन में बात करनी चाहिए और एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (ईएसी) और स्टेट एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (एसइएसी) के बाद फाइल प्रोसेसिंग का स्टेटस सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होना चाहिए।
स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को 45 दिन की अवधि में जन सुनवाई आयोजित करनी चाहिए। प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी पर साइट विजिट और सर्टिफिकेशन के लिए 30 दिन का प्रस्ताव किया गया है।
पीएमओ की राय है कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को बेसलाइन डाटा मॉनीटरिंग के लिए मौजूदा अवधि 3 माह को घटा कर 30 दिन करने के प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। पीएमओ का यह भी मानना है कि ईएसी की भूमिका में भी सुधार की जरूरत है।
प्रोजेक्टों को समय से मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए पीएमओ में प्रिसिपल सेक्रेटरी ने प्रस्ताव किया है कि ईएसी की बैठकें बढ़ाई जानी चाहिए, जिससे 30 दिन से ज्यादा कोई मंजूरी लंबित न रहे। प्रिंसिपल सेक्रेटरी का कहना है कि एमओईएफ को ईएसी को एडवाइजरी जारी कर यह बताना चाहिए कि वह एमओईएफ द्वारा तय शर्तों से इतर अतिरिक्त शर्तों से परहेज करे।
पीएमओ ने फैसला किया है कि ईएसी को सलाह दी जानी चाहिए कि स्टैंडर्ड टर्म्स ऑफ रेफरेंस (जीओआर) के अलावा नई या दोहराव वाली स्टडीज को शामिल न करने करे जबकि ऐसे मुद्दों पर मजबूत प्रतिबद्धता उपलब्ध हो।
मंजूरी के तंत्र में सुधार के लिए प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने एमओईएफ को मौजूदा गाइडलाइंस में संशोधन करने और जरूरत के हिसाब से स्पष्टीकरण जारी करने का निर्देश दिया है। प्रस्ताव किया गया है कि एमओईएफ को प्रोजेक्ट में बदलाव या आधुनिकीकरण के मामलों के लिए गाइडलाइंस बनानी चाहिए।
इसमें पहले से पर्यावरण मंजूरी लेने वाले मौजूदा प्रोजेक्टों को अलग से पर्यावरण मंजूरी लेने या कम से कम जन सुनवाई से छूट मिलनी चाहिए, बशर्ते इससे पहले से मंजूरी सीमा से अधिक अतिरिक्त प्रदूषण का बोझ न पड़ता और लोगों के विस्थापन का मामला न हो।
पीएमओ ने एमओइएफ से अंडरग्राउंड केबल्स और ट्रांसमिशन लाइन्स के लिए जनरल अप्रूवल पावर्स के लिए ताजी गाइडलाइंस में बदलाव करने को कहा है। इसके तहत इसमें गैस पाइपलाइन, सीएनजी और पीएनजी पाइपलाइनों को भी शामिल करने को कहा गया है।