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प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी पेंशन योजना पर भी वसूला जा रहा है सेवा कर

Sun, 01 Feb 2015 08:59 PM IST
नई दिल्ली/ शिशिर चौरसिया
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कर राजस्व का लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में कर अधिकारी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की वैसी पॉलिसियों पर भी सेवा कर वसूल रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष प्रयास से शुरू किया गया है। सेवा कर लगने से यह पेंशन पॉलिसी बिक नहीं रही है, जबकि सरकार की तरफ से दवाब होने की वजह से एलआईसी प्रबंधन इसे बेचने पर ज्यादा जोर दे रहा है। इस चक्कर में इन दिनों एलआईसी एजेंटों पर बेवजह दवाब डाला जा रहा है।
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दिल्ली में काम करने वाले एक बड़े एजेंट ने बताया कि इन दिनों वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना की पॉलिसी बेचने पर एलआईसी की तरफ से काफी दवाब पड़ रहा है, जबकि सेवा कर के चक्कर में इसे कोई खरीदना नहीं चाहता है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति इस पॉलिसी के तहत 1 लाख रुपये जमा करता है और कुछ दिन बाद उसका उनका निधन हो जाता है तो उसके नामित को 97,000 रुपये से भी कम राशि मिलेगी क्योंकि इस पर 3.09 फीसदी राशि सेवा कर के रूप में काट ली जाएगी। उन्होंने बताया इसी तरह टेबल नंबर 189 की एन्युटी पेंशन योजना पर भी सेवा कर वसूला जा रहा है, जबकि इसमें एक पैसे का बीमा नहीं होता।

पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार कार्यकाल में सीमित समय के लिए वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना शुरू की गई थी, जो कि काफी लोकप्रिय हुई थी। इस पॉलिसी की विशेषता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अवगत थे इसलिए इस पॉलिसी को दुबारा शुरू करने पर उन्होंने जोर दिया था। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2014-15 के बजट में इसे शुरू करने की घोषणा की थी। यह योजना 14 अगस्त 2015 तक के लिए खुली है। इसके तहत 60 वर्ष से ऊपर के उम्र वालों के लिए तत्काल पेंशन की व्यवस्था है। इसमें वार्षिक पेंशन लेने पर 9.38 फीसदी जबकि मासिक पेंशन लेने पर 9.0 फीसदी के दर से उच्च प्रतिफल मिलता है।
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एलआईसी ने इस योजना की शुरूआत कर दी है। इसमें ज्यादा प्रतिफल होने की वजह से इस पॉलिसी पर एजेंट को कुल राशि का महज 0.01 फीसदी कमीशन दिया जा रहा है। इसके अलावा इस पॉलिसी को बेचने पर उन्हें कोई रिवार्ड भी नहीं मिलता। इसलिए वे इसे बेचने में रुचि लेते ही नहीं हैं। इस पॉलिसी में धारक को किसी किस्म का बीमा नहीं दिया जाता, तब भी इस पर सेवा कर के रूप में 3.09 फीसदी की राशि ली जा रही है। इसी वजह से ग्राहक आकर्षित नहीं हो पाते।
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