सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन और अहम परियोजनाओं को लागू करने में देरी से नाराज पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा ने खासतौर पर ओएनजीसी की परियोजनाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कांट्रैक्ट और टेंडर की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर बदलाव करने को कहा है।
हाल में हुई समीक्षा बैठक में चंद्रा ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि हाल के महीनों में ऐसी परियोजनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है,जिनको लागू करने में देरी हो रही है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने पाया है कि अप्रैल 2014 तक 84 पेट्रोलियम प्रोजेक्ट में से 53 प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
इन प्रोजेक्टों में से 25 प्रोजेक्ट दो वर्ष से अधिक समय की देरी से चल रहे हैं। हालांकि जुलाई 2014 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देरी से चल रहे प्रोजेक्टों की संख्या बढ़ कर 56 हो चुकी है। वहीं मात्र तीन माह में दो वर्ष से अधिक समय की देरी से चल रहे प्रोजेक्टों की संख्या 25 से बढ़ कर 34 हो गई है।
इस परिदृश्य से परेशान पेट्रोलियम सचिव चंद्रा ने देरी और कानूनी विवाद से बचने के लिए एक्सप्लोरेशन एवं प्रोडक्शन कंपनियों के मौजूदा टेंडरिंग एंड कांट्रैक्टिंग प्रोसीजर में बड़े पैमाने पर बदलाव करने को कहा है। चंद्रा चाहते हैं कि प्रोजेक्टों के क्रियान्वयन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही बेस्ट प्रैक्टिसेज को मानक बनाया जाए।
उन्होंने निर्देश दिया है कि हर अहम प्रोजेक्ट के पूरा होने पर वेंडर के प्रदर्शन पर रिपोर्ट तैयार कर पेट्रोलियम मंत्रालय से साझा किया जाए, जिससे इस रिपोर्ट को दूसरे पीएसयू से भी साझा किया जा सके।
मंत्रालयों और राज्यों से वैधानिक मंजूरी हासिल करने से जुड़ा मुद्दा कैबिनेट सेक्रेटेरिएट की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया है। इस तरह से मुद्दा पेट्रोलियम मंत्रालय की जानकारी में लाया जा सकता है, और मंत्रालय वैधानिक मंजूरी जल्द जारी करने के लिए संबंधित विभागों या राज्यों से अनुरोध कर सकता है।
ओएनजीसी को 12 ऑफशोर सप्लाई वेसेल्स देने में पीपावाव के कमजोर प्रदर्शन से नाराज चंद्रा ने इस पूरे मामले की जांच कराने को कहा है। उन्होंने अतिरिक्त सचिव और फाइनेंसियल एडवाइजर एससी खुंतिया को प्रोजेक्ट से जुड़ा मुद्दा सुलझाने के लिए ओएनजीसी और पीपावाव के साथ अलग-अलग वैठक करने को कहा है।
ओएनजीसी ने पहले ही कांट्रैक्टर से मासिक पर्सेंटेज प्रोग्रेस टारगेट के साथ संशोधित कंपलीशन प्लान जमा कराने को कहा है। कांट्रैक्ट के साथ कई चीजें गलत हुईं हैं। शिपयार्ड पर कुशल मैनपावर की कमी को भी देरी के लिए प्रमुख तौर पर जिम्मेदार बताया गया है।
इसी तरह से उन्होंने दाहेज, गुजरात में आ रहे ओएनजीसी के पेट्रो एडीशंस लिमिटेड (ओपीएएल) मेगापेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट की प्रगति पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने ओएनजीसी को एक माह के अंदर उपयुक्त बैकग्राउंड वाले एक अलग सीईओ की पहचान करने को कहा है।
ओएनजीसी से ऐसे प्रत्येक फील्ड से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अतिरिक्त उत्पादन पर ब्यौरा जमा कराने को कहा गया है, जहां प्रोजेक्ट पूरा हो गया है और उत्पादन शुरू हो गया है।