इराक में चल रहे संघर्ष की आंच महंगाई की आग को और ज्यादा भड़का सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए तेल कंपनियां को पेट्रोल के दाम बढ़ाने का फैसला कर सकती हैं।
यह बढ़ोतरी एक से डेढ़ रुपये के करीब होने का अनुमान है। हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फिलहाल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित बताते हुए पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि से इनकार किया है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़े कच्चे तेल के दाम
इराक में सरकार और विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल का भाव बढ़कर 106 डॉलर से बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 60 के स्तर पर रही, तो कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल एक डॉलर की बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल का दाम 30 पैसे बढ़ाना पड़ेगा। इस हिसाब से पेट्रोल के दाम 1.50 रुपये बढ़ने की आशंका है।
अगर इराक में संघर्ष बढ़ा और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम इससे ज्यादा भी बढ़ाने पड़ सकते हैं।
डीजल भी होगा महंगा
इराक संकट के बाद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मोदी सरकार के लिए कई मोर्चों पर मुश्किलें खड़ी करेंगी। हाल के महीनों में रुपये की मजबूती के चलते ऑयल सब्सिडी और राजकोषीय घाटे के काबू में आने की उम्मीद जगी थी।
डीजल की कीमतों में 50 पैसे की मासिक वृद्धि थमने के भी आसार बनने लगे थे, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में लगी अचानक आग से तेल आयात और सब्सिडी का भार बढ़ना तय है। इसकी मार आखिरकार महंगाई के तौर पर आम जनता पर ही पड़ेगी।
डीजल पर लंबी चलेगी 50 पैसे वृद्धि
कच्चा तेल महंगा होने से राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर भी सरकार को झटका लगेगा। इससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ना भी तय है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए डीजल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के मंसूबों पर भी पानी फिर सकता है और 50 पैसे की मूल्य वृद्धि लंबे समय तक जारी रह सकती है।