आने वाले समय में ऑयल रिफाइनरी की तरह ही बायो रिफाइनरी होंगी। बायो फ्यूल से पेट्रोल, डीजल, गैस सहित ऊर्जा के अन्य विकल्पों को तैयार किया जा सकेगा। दयालबाग शिक्षण संस्थान में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में इसकी जानकारी दी गई। साथ ही बायो फ्यूल की संभावनाओं और चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलोजी, नई दिल्ली के डा. वी शिवा रेड्डी ने बताया कि बायो रिफाइनरी से पेट्रोल, डीजल, गैस सहित अन्य ऊर्जा के स्रोत तैयार करने की दिशा में उम्मीद जगी है। एग्रीकल्चर वेस्ट, ऐल्गी सहित अन्य वेस्ट पदार्थों से एन्जाइम्स द्वारा बायो फ्यूल तैयार किया जाएगा।
इस फ्यूल से रिफाइनरी में गैस, डीजल सहित कई केमिकल प्रोडक्ट तैयार होंगे। तीन साल में इसे कमर्शियल रूप से इस्तेमाल करने पर काम चल रहा है। इस दौरान पीसीआरए के निदेशक एके गोयल, आईओसीएल के नीरज खरे और शांतनु मुखर्जी, डीईआई के निदेशक प्रोफेसर वीजी दास, डीन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग प्रोफेसर डीएस मिश्रा, प्रोफेसर डी जनेश्वर राय, प्रोफेसर डी भगवान दास, प्रोफेसर वी प्रेम प्यारा मौजूद रहे।
भोज्य पदार्थों से तैयार नहीं होगा बायोडीजल
कार्यशाला में बताया गया कि अन्य देशों की भोज्य पदार्थ से बायो डीजल तैयार किया जा रहा है। मगर, हमारे यहां ऐसा नहीं किया जाएगा। साथ ही जेट्रोफा, एग्रीकल्चर वेस्ट, ऐल्गी सहित अन्य वेस्ट से बायो फ्यूल तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
डीईआई में ऊर्जा के विकल्पों पर कार्य
डीईआई में 2003 से जेट्रोफा उत्पादन एवं जैविक ईंधन का उत्पादन किया जा रहा है। किसानों के लिए कार्यशाला भी आयोजित की गई है। संस्थान में सोलर एनर्जी से 500 किलोवाट बिजली का उत्पादन करने के साथ मेहताब बाग के लिए 40 किलोवाट का बिजली उत्पादन सिस्टम तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई।