परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया के छह शक्तिशाली देशों के साथ ईरान के समझौते के बाद तेल कीमतों में गिरावट आनी शुरू हो गई है।
तेल के भारी भरकम आयात बिल के चलते चालू खाते के भारी घाटे से जूझ रही सरकार के लिए यह खासी राहत की बात है।
इसके अलावा महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए भी आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में तेल की कीमतें घटने की उम्मीद जगी है।
आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद में अंतररारष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव दो डॉलर की गिरावट के साथ 109 डॉलर प्रति बैरल से नीचे उतर गया। इस दौरान लंदन क्रूड ऑयल का वायदा भाव 2.26 डॉलर कमजोर होकर 108.79 डॉलर प्रति बैरल बोला गया।
उद्योग जगत ने ईरान के इस करार को भारत के लिए फायदेमंद बताया है। फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई का कहना है कि इस करार से ईरान से तेल के आयात में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते आ रही बाधा दूर हो जाएगी।
एसोचैम के अध्यक्ष राणा कपूर ने भी इस करार के बाद भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय कारोबार बढ़ने की बात कही। साथ ही भारत के तेल आयात बिल में भी कमी आएगी। महंगाई का दबाव भी आने वाले दिनों में घट सकता है।
देश की करीब 85 फीसदी तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी होने के चलते सरकार को सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल के आयात पर ही खर्च करनी पड़ती है।