अगर सरकार की योजना कामयाब रही, तो लोगों को एसएमएस और ईमेल के जरिए सस्ते राशन की सूचना मिला करेगी। फर्जी राशन कार्ड और सस्ते राशन की चोरी पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने पूरी जन वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण की तैयारी कर ली है। इसके तहत लोगों को टोल-फ्री नंबरों के जरिए राशन से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की व्यवस्था सुविधा भी दी जाएगी।
खाद्य मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे पीडीएस सिस्टम को हाईटेक करने के लिए करीब 884 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। सरकारी भंडार से लेकर राशन की दुकान तक आपूर्ति के हरेक स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए कंप्यूटरीकरण का सहारा लिया जाएगा।
देश के कई जिलों में बायोमेट्रिक कार्ड और कंप्यूटरीकरण के जरिये राशन की चोरी और फर्जी राशन कार्ड के मामले रोकने में कामयाबी मिली है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना को व्यापक स्तर पर लागू करने का फैसला किया है।
इस योजना में केंद्र और राज्यों की बराबर भागीदारी होगी। इस पर केंद्र सरकार 489.37 करोड़ रुपये और राज्य सरकारें 394.70 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केन्द्र और राज्यों में खर्च की हिस्सेदारी 90ऱ्10 के अनुपात तय की गई है। सरकार ने अगले साल अक्तूबर तक इस योजना को लागू करने का लक्ष्य तय किया है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कंप्यूटरीकरण के जरिये सरकार सिर्फ लक्षित समूह को ही सस्ता राशन मुहैया करने की अपनी नीति को अमल में लाना चाहती है। इसके लिए एसएमएस, ई-मेल, टोल-फ्री नम्बर आदि के जरिये राशन आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाएगा। योजना के तहत पूरे डेटाबेस के डिजिटलीकरण के अलावा एक जन शिकायत एवं पारदर्शिता पोर्टल बनाने की तैयारी भी चल रही है।