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चिदंबरम ने पेश किया वित्तीय मजबूती का रोडमैप

Mon, 29 Oct 2012 06:53 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.3 फीसदी रहने की संभावना जताई है। सरकार का यह लक्ष्य पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के समय किए गए तय लक्ष्य 5.1 फीसदी से ज्यादा है। हालांकि सरकार अगले पांच साल में इसे घटाकर 3 फीसदी करने की बात कर रही है।
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वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा दिए गए कंसालिडेशन प्लान का असर मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पेश की जाने वाली मौद्रिक नीति पर भी दिख सकता है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि आरबीआई मंगलवार को मौद्रिक नीति पेश करते वक्त राजकोषीय समेकन के प्लान को भी ध्यान रखेगा।

सोमवार को राजकोषीय समेकन (कंसालिडेशन) के रोडमैप को पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि मेरा काम सच्चाई को सामने रखना है, जैसा मैं देख रहा हूं उसे देखते हुए पूर्व लक्ष्य 5.1 फीसदी को हासिल करना मुश्किल है, हालांकि 5.3 फीसदी के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सभी तरह के कदम उठाए जाएंगे।
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इसके पहले केलकर कमेटी ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 6.1 फीसदी रहने की बात कही थी। सोमवार को संवाददाताओं से बात करते हुए वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष में 30 हजार करोड़ रुपये विनिवेश और 40 हजार करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम की नीलामी के जरिए जुटने की उम्मीद जताई है।

केलकर रिपोर्ट की सिफारिशों पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कमेटी की कुछ सिफारिशों को स्वीकार किया है। राजकोषीय समेकन योजना के तहत सरकार वित्त वर्ष 2013-14 में राजकोषीय घाटे को 4.8 फीसदी, 2014-15 में 4.2 फीसदी, 2015-16 में 3.6 फीसदी और 2016-17 में 3 फीसदी लाने की बात कही है।

चालू खाते के घाटे पर चिदंबरम ने कहा कि सरकार के सामने राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा प्रमुख चुनौतियां है। चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.7 फीसदी रहने की संभावना है, जो कि 2011-12 में 4.2 फीसदी था।

सरकार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी संस्थागत निवेशकों और विदेशी वाणिज्यिक उधारी से इन लक्ष्यों को पाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने इसके अलावा डायरेक्ट टैक्स कोड पर कहा कि इसकी समीक्षा की जा रही है। जिस पर स्थायी समिति की सिफारिशों के आने के बाद संसद में रखा जाएगा।
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