बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर बांड से जुड़ी कर बचत योजना पर नए सिरे से विचार कर रही है। सोमवार को बैंकिंग जगत के प्रतिनिधियों ने भी वित्त मंत्री से आयकर में इंफ्रास्ट्रक्चर बांड के जरिए कर बचत के प्रावधान को दोबारा शुरू करने की मांग की है।
वर्ष 2010-11 के बजट में सरकार ने इस तरह कर बचत सुविधा शुरू की थी, जिसके तहत आयकर में 20 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत की जा सकती थी। लेकिन निवेशकों के फीके रुझान को देखते हुए सरकार ने बाद में यह प्रावधान खत्म कर दिया था। वित्त मंत्री के साथ हुए बजट पूर्व बैठक में बैंकिंग जगत के प्रतिनिधियों ने बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बांड के जरिए कर बचत को फिर से बहाल करने की मांग की है।
मौजूदा स्थितियों में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र जिस तरह पूंजी की कमी से जूझ रहा है, उसे देखते हुए सरकार फिर से इस तरह की योजना पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि चूंकि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लंबी अवधि के बड़े निवेश की जरूरत है, इसलिए नई योजना में इस बात को ध्यान में रखकर ही इसकी रूपरेखा तैयारी की जाएगी। पिछली बार दी गई छूट के अनुभवों को देखते हुए इंफ्रा क्षेत्र में दीर्घ अवधि के निवेश को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र खासकर सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते कई परियोजनाएं अटकी हैं और नए प्रोजेक्ट लेने के लिए भी कंपनियां आगे आने से हिचक रही हैं।
मौजूद स्थिति के मद्देनजर सरकार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए पिछले बजट में सरकार ने टैक्स फ्री इंफ्रा बांड का ऐलान किया था। इसके तहत सरकार एनएचएआई, हुडको, पीएफसी जैसे 10 इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों को 60 हजार करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दे चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं के समाधान के लिए सरकार कोई नई योजना पेश कर सकती है।