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यूपी, पंजाब के शहरों से ऑनलाइन रिटेल कंपनियों की तौबा

Tue, 11 Jun 2013 09:52 PM IST
नई दिल्ली/रक्षित सिंह
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ऑनलाइन रिटेल कंपनियों ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के कुछ शहरों में उत्पादों की डिलीवरी को लेकर खास पाबंदियां लगा दी हैं।
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देश की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर फ्लिपकार्ट ने नोएडा और गाजियाबाद में 10,000 रुपये से ज्यादा के उत्पादों की डिलीवरी पर रोक लगा दी है। इसी तरह कई अन्य कंपनियों ने भी नोएडा, गाजियाबाद, चंडीगढ़, जयपुर आदि शहरों में हाई-वैल्यू उत्पादों की ‘कैश ऑन डिलीवरी’ पर रोक लगा दी है।

इन शहरों में कैश ऑन डिलीवरी के तहत बड़ी संख्या में कंपनियों के ऑर्डर कैंसिल हो रहे थे। इन शहरों से बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहकों से ऑर्डर मिल रहे थे, जो डिलीवरी लेने से इंकार कर रहे थे। इसके चलते कंपनियों को कुरियर चार्ज, इंश्योरेंस आदि का पूरा खर्च उठाना पड़ रहा था, जिससे कंपनियों को खासा नुकसान हो रहा था।
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प्रमुख ऑनलाइन रिटेलर मिंट्रा डॉट कॉम के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) दीपक ऋषि ने बताया कि ऑर्डर कैंसिलेशन टियर 2 शहरों जैसे नोएडा, चंडीगढ़, जयपुर, गुवाहटी, भुवनेश्वर आदि में ज्यादा होता है। यह उन ग्राहकों की वजह से होता है, जो पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और ऑनलाइन सिस्टम को टेस्ट करना चाहते हैं।

ज़िवामे डॉट कॉम की चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ऋचा कर का कहना है कि जालंधर, इंदौर और तेजपुर जैसे शहरों से सबसे ज्यादा ऑर्डर कैंसिल होते हैं। हालांकि, वह इसका कारण डिलीवरी में देरी को बताती हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर फ्लिपकार्ट डॉट कॉम ने उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों जैसे नोएडा और गाजियाबाद में 10,000 रुपये से ज्यादा के उत्पादों की डिलीवरी पर पाबंदी लगा दी है।

इस बारे में कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह पूरी तरह से व्यावसायिक निर्णय है और समय-समय पर परिस्थिति के मुताबिक बदलता रहता है। सी-बाजार डॉट इन के सह-संस्थापक रितेश कटारिया ने बताया कि भारत में विभिन्न ऑनलाइन रिटेलरों के लिए ऑर्डर कैंसिलेशन का औसत 5 से 50 फीसदी तक होता है।

जबकि, अमेरिका में यह आंकड़ा महज 1-2 फीसदी है। उनका कहना है कि अभी भारत में कैश-ऑन डिलीवरी की हिस्सेदारी ज्यादा है। आने वाले एक साल के दौरान जब मोबाइल पेमेंट की सुविधा तेजी के साथ विकसित होगी, तब ऑर्डर कैंसिलेशन की दर में भी काफी कमी आएगी।

ऑनलाइन बाजार का बोलबाला
15 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट उपभोक्ताओं के बूते 2012-13 के अंत में भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 8,400 करोड़ रुपये का रहा है। वहीं, साल दर साल इस बाजार के 100 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है। ऑनलाइन रिटेलर्स जैसे फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, मिंट्रा आदि बाजार से कम कीमतों में उत्पाद ग्राहकों को मुहैया करा रहे हैं।

अमेजन की एंट्री, फ्लिपकार्ट को चुनौती
61 अरब डॉलर की आय वाली ऑनलाइन बिक्री करने वाली दिग्गज ग्लोबल कंपनी अमेजन की भारत में एंट्री से फ्लिपकार्ट जैसी भारतीय कंपनियों को सीधे तौर पर चुनौती मिलेगी।

हालांकि अमेजन जंगली डॉट कॉम के जरिये महीनों पहले ही देश में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है, पर वह अपने ब्रांड नाम के तहत देश में दस्तक देने की तैयारी में है। अमेजन भारत के ऑनलाइन बाजार में अपनी पैठ जमाने के लिए करोड़ों डॉलर मार्केटिंग पर खर्च करेगी, जिससे घरेलू बाजार में अब तक आगे चल रही फ्लिपकार्ट को कड़ी चुनौती मिलना तय है।

अभी तक फ्लिपकार्ट देश में सबसे बड़ी ऑनलाइन बुक रिटेलर है। लेकिन, अमेजन के खाते में 70 लाख से ज्यादा बुक टाइटल मौजूद हैं। इसके अलावा 13 हजार से ज्यादा मूवी टाइटल की मालिक अमेजन आगे चलकर मोबाइल और कैमरा श्रेणी में भी उतरेगी। यह दोनों ही श्रेणी फ्लिपकार्ट के लिए बड़े राजस्व का स्रोत हैं।
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फ्लिपकार्ट के पास अपनी खुद की इनवेंटरी होती है। अमेजन भारत में मार्केटप्लेस रणनीति के साथ उतर रही है, जिसके तहत कंपनी थर्ड पार्टी रिटेलर्स को बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया कराएगी। इस तरह कंपनी को इनवेंटरी का खर्च नहीं सहना पड़ेगा।
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